सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान में गहराया पानी संकट; खेती-किसानी पर मंडराया खतरा

सिंधु जल संधि पर भारत का सख्त रुख, पाकिस्तान में गहराया पानी संकट; खेती-किसानी पर मंडराया खतरा

Johar News Times
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भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर अपनाए गए सख्त रुख का असर अब पाकिस्तान में साफ दिखाई देने लगा है। पाकिस्तान के कई हिस्सों में सिंचाई के पानी की भारी कमी महसूस की जा रही है, जिससे खेती-किसानी पर संकट गहराने लगा है। खासकर पंजाब, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा के कृषि क्षेत्रों में किसानों की चिंता बढ़ गई है।

पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स और कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, यदि जल्द हालात नहीं सुधरे तो देश में खाद्य संकट की स्थिति पैदा हो सकती है। पानी की कमी से फसलों की पैदावार प्रभावित होने लगी है और किसानों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।

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चावल समेत कई फसलें खतरे में

रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान के किसान सबसे ज्यादा चावल की खेती को लेकर परेशान हैं, क्योंकि इस फसल के लिए लगातार और पर्याप्त सिंचाई जरूरी होती है। कृषि विशेषज्ञ डॉ. अब्दुल रऊफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पानी का प्रवाह लंबे समय तक बाधित रहा तो इसका सीधा असर कृषि उत्पादन पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा कि चावल के अलावा तरबूज, खरबूजा और आम जैसी फसलें भी लगातार पानी पर निर्भर करती हैं। पानी की कमी से उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी और खाद्य सुरक्षा पर भी गंभीर असर पड़ सकता है।

क्या है सिंधु जल संधि?

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भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुई थी। इस समझौते के तहत रावी, ब्यास और सतलुज नदियों का नियंत्रण भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब नदियों का पानी पाकिस्तान के हिस्से में गया।

यह संधि दशकों तक दोनों देशों के बीच तनाव और युद्धों के बावजूद लागू रही। लेकिन हाल के वर्षों में सीमा पार आतंकवाद और बढ़ते तनाव के बाद भारत ने इस समझौते को लेकर सख्त रुख अपनाना शुरू किया है।

पाकिस्तान सरकार पर बढ़ा दबाव

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पानी संकट गहराने के साथ ही पाकिस्तान की सरकार पर भी दबाव बढ़ने लगा है। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख असीम मुनीर से इस मुद्दे पर जवाब मांगे जा रहे हैं। पाकिस्तान ने इस मामले को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की कोशिश की है, लेकिन भारत का रुख साफ है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते।

सूत्रों के अनुसार पाकिस्तान के भीतर अब यह बहस तेज हो गई है कि भारत के फैसले का सामना कैसे किया जाए। कुछ कट्टरपंथी संगठन भड़काऊ बयान दे रहे हैं, लेकिन सबसे ज्यादा चिंता किसानों और आम नागरिकों में देखी जा रही है।

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर

विशेषज्ञों का मानना है कि सिंधु जल प्रणाली पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती है। देश की बड़ी आबादी खेती और सिंचाई पर निर्भर है। ऐसे में यदि पानी की कमी लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर सिर्फ कृषि क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा।पानी संकट का प्रभाव बिजली उत्पादन, उद्योगों और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते जल तनाव पर अब पूरी दुनिया की नजर टिकी हुई है।

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