नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार ने क्रूड ऑयल और प्राकृतिक गैस के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बड़ा फैसला लेते हुए रॉयल्टी दरों में कमी की है। यह कदम गहरे समुद्र (डीपवाटर) और अति-गहरे समुद्र (अल्ट्रा-डीपवाटर) सहित विभिन्न उत्पादन क्षेत्रों पर लागू किया गया है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने 8 मई से संशोधित दरों को प्रभावी कर दिया है।
सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में ऊर्जा उत्पादन को बढ़ाना, विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना और तेल-गैस क्षेत्र में अधिक निवेश आकर्षित करना है।
कंपनियों की लागत घटेगी, निवेश बढ़ने की उम्मीद
इन बदलावों से तेल और गैस कंपनियों की उत्पादन लागत कम होने की संभावना जताई जा रही है। सरकार को उम्मीद है कि रॉयल्टी दरों में कमी से घरेलू और विदेशी दोनों निवेशकों को भारतीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा।
नई रॉयल्टी दरें क्या कहती हैं?
संशोधित ढांचे के अनुसार—
- ऑनशोर (भूमि आधारित) क्रूड ऑयल उत्पादन पर रॉयल्टी घटाकर 10% कर दी गई है।
- ऑफशोर (समुद्री क्षेत्र) क्रूड उत्पादन पर रॉयल्टी अब 8% होगी।
- प्राकृतिक गैस (Natural Gas) पर भी प्रभावी रॉयल्टी दर घटाकर 8% निर्धारित की गई है।
इसके साथ ही सरकार ने रॉयल्टी गणना के लिए एक नया सपाट कटौती फार्मूला लागू किया है।
वेल हेड प्राइस पर नई गणना प्रणाली
नए नोटिफिकेशन के अनुसार अब रॉयल्टी की गणना ‘वेल हेड प्राइस’ के आधार पर की जाएगी। इसमें वेल हेड के बाद आने वाली लागतों के लिए एक निश्चित कटौती की अनुमति दी गई है।
- नॉमिनेशन रेजीम ब्लॉकों के लिए: सेल प्राइस का 20% कटौती
- अन्य रेजीमों के लिए: 15% कटौती
पहले रॉयल्टी की गणना उत्पादन के बाद वास्तविक लागतों के आधार पर होती थी, जिससे प्रभावी रॉयल्टी दरें अधिक हो जाती थीं।
गहरे समुद्र क्षेत्र को विशेष रियायतें
सरकार ने कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष रियायतें भी जारी रखी हैं।
डिस्कवर्ड स्मॉल फील्ड (DSF) नीति और हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन एंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (HELP) के तहत—
- गहरे और अति-गहरे समुद्री क्षेत्रों में पहले 7 वर्षों तक कोई रॉयल्टी नहीं लगेगी।
- 8वें वर्ष से रॉयल्टी लागू होगी: गहरे समुद्री ब्लॉकों पर 5%
अति-गहरे समुद्री ब्लॉकों पर 2%
यह छूट क्रूड ऑयल, कंडेनसेट और प्राकृतिक गैस दोनों पर लागू होगी।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
सरकार का मानना है कि यह नीति देश को ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। रॉयल्टी में राहत से उत्पादन बढ़ने, लागत घटने और भारत की आयात निर्भरता कम होने की उम्मीद है।
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