बिस्टुपुर स्थित फ्लेबोटोमी ट्रेनिंग सेंटर में संस्कृति सोशल वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा ‘अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस’ के अवसर पर एक गरिमामयी कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान भविष्य के स्वास्थ्य कर्मियों (फ्लेबोटोमी छात्रों) ने नर्सिंग जगत के समर्पण और सेवा भाव को नमन किया।
केक काटकर साझा की खुशियाँ
कार्यक्रम की शुरुआत अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवस के उपलक्ष्य में केक काटकर की गई। फ्लेबोटोमी कोर्स का प्रशिक्षण ले रहे विद्यार्थियों ने नर्सों द्वारा मानवता के प्रति दिए जा रहे अतुलनीय योगदान की सराहना की। उपस्थित वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि एक मरीज के स्वस्थ होने में डॉक्टर के परामर्श के साथ-साथ नर्स की ममतामयी सेवा का सबसे बड़ा हाथ होता है।
संस्था के शिक्षक सौमित्रा चक्रवर्ती ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा:
“नर्सें स्वास्थ्य सेवा की असली रीढ़ होती हैं। उनका त्याग, धैर्य और समर्पण हर मरीज को नई उम्मीद देता है। समाज में उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता।”
वहीं, संस्था की संस्थापिका ने कहा कि नर्सें स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी हैं, जो कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मरीजों की सेवा के लिए तत्पर रहती हैं। उनका जीवन समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।
मानव सेवा और अनुशासन का पाठ
विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित डॉ. रंजन कृष्ण बोस ने विद्यार्थियों को चिकित्सा क्षेत्र की बारीकियों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि चिकित्सा के क्षेत्र में केवल डिग्री ही काफी नहीं है, बल्कि सेवा, संवेदनशीलता और अनुशासन सबसे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने छात्रों को भविष्य में एक निस्वार्थ सेवक बनने की प्रेरणा दी।
फ्लोरेंस नाइटिंगेल को किया याद
कार्यक्रम के अंत में आधुनिक नर्सिंग की जनक फ्लोरेंस नाइटिंगेल को उनकी जयंती पर याद किया गया। छात्रों को बताया गया कि कैसे उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में नर्सिंग व्यवस्था की नींव रखी, जो आज करोड़ों लोगों का जीवन बचा रही है।
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