झरिया और आसपास के इलाकों में भूमिगत आग और भू-धंसान का खतरा एक बार फिर सुर्खियों में है। बीसीसीएल ब्लॉक-2 क्षेत्र की एबीओसीपी परियोजना के विस्तार और केशरगढ़ बस्ती में बढ़ती भूमिगत आग की गंभीरता को देखते हुए प्रबंधन ने बस्ती को खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रशासन और प्रबंधन का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो यहाँ किसी भी वक्त बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
सीएमडी के निर्देश पर प्रबंधन और ग्रामीणों में मंथन
बीसीसीएल सीएमडी के विशेष निर्देश पर क्षेत्रीय कार्यालय में प्रबंधन और केशरगढ़ के ग्रामीणों के बीच एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई। इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य सुरक्षा और पुनर्वास के बीच समन्वय बनाना था।
- जीएम
- क्षेत्रीय जीएम
- सलाहकार
- नोडल अधिकारी
- एजीएम
पुनर्वास और नियोजन की मांग पर अड़े ग्रामीण
वार्ता के दौरान रैयतों और ग्रामीणों ने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई, लेकिन साथ ही अपनी मांगों को भी मजबूती से रखा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि वे बस्ती खाली करने को तैयार हैं, बशर्ते उन्हें स्वीकृत नियोजन दिया जाए और पुनर्वास की प्रक्रिया पारदर्शी हो।
बीसीसीएल अधिकारियों ने बताया कि मुख्यालय का पूरा ध्यान केशरगढ़ बस्ती को अविलंब खाली कराने पर है। इसके पीछे दो मुख्य कारण हैं:
- एबीओसीपी परियोजना के विस्तार के लिए इस भूमि की आवश्यकता है।
- पूरा इलाका भूमिगत आग और भू-धंसान की जद में है। अधिकारियों ने आशंका जताई है कि जमीन के अंदर बढ़ती गर्मी कभी भी बड़े धंसान का रूप ले सकती है।
प्रबंधन ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि उनकी जायज मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा और उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।
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