चाईबासा/सारंडा: सारंडा के जंगलों में सुरक्षा बलों और नक्सलियों के बीच दो दिनों तक चली भीषण मुठभेड़ के बाद स्थिति का जायजा लेने आज CRPF के स्पेशल डीजी (SDG) दीपक कुमार खुद बालिबा कैंप पहुँचे। उन्होंने सर्च ऑपरेशन की कमान संभाल रहे अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की और नक्सलियों के खिलाफ आर-पार की रणनीति तैयार की।
प्रमुख बिंदु: समीक्षा बैठक और रणनीति
- जमीनी हकीकत: स्पेशल डीजी दीपक कुमार ने बालिबा स्थित 193जी बटालियन कैंप में झारखंड सेक्टर के आईजी साकेत कुमार, एसटीएफ आईजी अनूप बिरथरे और चाईबासा एसपी अमित रेणु के साथ मौजूदा ऑपरेशन की बारीकियों को समझा।
- जवानों का बढ़ाया हौसला: मुठभेड़ के बाद जंगलों में डटे जवानों के बीच पहुँचकर उन्होंने उनका मनोबल बढ़ाया और विषम परिस्थितियों में उनकी बहादुरी की सराहना की।
नक्सलियों को सीधा अल्टीमेटम: ‘सरेंडर या मौत’
हेलीपैड पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान स्पेशल डीजी ने बेहद सख्त लहजे में नक्सलियों को संदेश दिया:
- एक महीने का वक्त: उन्होंने कहा कि सारंडा में सक्रिय नक्सलियों के पास सरेंडर करने के लिए केवल एक महीने का समय है।
- कठोर कार्रवाई: एसडीजी ने स्पष्ट कहा, “अगर वे आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो वे निश्चित रूप से मारे जाएंगे।”
- सक्रियता: खुफिया जानकारी के अनुसार, वर्तमान में सारंडा के जंगलों में करीब 45 से 50 नक्सली सक्रिय हैं। अब तक किसी भी संगठन ने सरेंडर के लिए सुरक्षा बलों से संपर्क (अप्रोच) नहीं किया है

“हमने नक्सलियों को मौका दिया है, लेकिन हमारी प्राथमिकता क्षेत्र को पूरी तरह मुक्त कराना है।” — दीपक कुमार, स्पेशल डीजी, सीआरपीएफ
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