जब इंदिरा गांधी ने भी कहा था- “सोना मत खरीदिए”, अब मोदी सरकार की अपील से फिर छिड़ी बहस

जब इंदिरा गांधी ने भी कहा था- “सोना मत खरीदिए”, अब मोदी सरकार की अपील से फिर छिड़ी बहस

Johar News Times
5 Min Read

1967 से 2026 तक… आर्थिक संकट के दौर में सोना क्यों बन जाता है बड़ा मुद्दा?

नई दिल्ली , वैश्विक आर्थिक तनाव और मिडिल ईस्ट संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लोगों से कुछ समय तक सोना नहीं खरीदने की अपील के बाद देश में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। इसी बीच 6 जून 1967 का एक ऐतिहासिक संदर्भ फिर चर्चा में आ गया है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भी देशवासियों से सोना नहीं खरीदने की अपील की थी।

- Advertisement -
Ad image

करीब छह दशक पहले भारत गंभीर विदेशी मुद्रा संकट से जूझ रहा था। उस समय देश के डॉलर भंडार पर भारी दबाव था और सोने के आयात को अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा था। ऐसे में इंदिरा गांधी ने जनता से “राष्ट्रीय अनुशासन” और “त्याग” की अपील करते हुए सोना खरीदने से बचने को कहा था।

1967 में इंदिरा गांधी ने क्या कहा था?

6 जून 1967 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में इंदिरा गांधी का बयान सामने आया था, जिसमें उन्होंने कहा था:
“हम विदेशी मुद्रा के मामले में बेहद गंभीर स्थिति का सामना कर रहे हैं। सोने का आयात हमारे ऊपर अतिरिक्त बोझ डालता है। इसलिए मैं सभी नागरिकों से अपील करती हूं कि वे किसी भी रूप में सोना न खरीदें। यह राष्ट्रीय अनुशासन और त्याग का समय है।”

उस दौर में सरकार ने गोल्ड कंट्रोल ऑर्डर के तहत कई प्रतिबंध भी लगाए थे। सरकार का मानना था कि सार्वजनिक सहयोग के बिना आर्थिक संकट से बाहर निकलना मुश्किल होगा।

- Advertisement -
Ad image

अब फिर क्यों उठी वही अपील?

वर्ष 2026 में भारत एक बार फिर वैश्विक आर्थिक दबाव का सामना कर रहा है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमत लगभग 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इससे भारत का आयात बिल तेजी से बढ़ा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है और दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ताओं में भी शामिल है।

विशेषज्ञों के अनुसार, जब तेल और सोने दोनों का आयात बढ़ता है, तो भारत को अधिक अमेरिकी डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है और रुपये की कीमत कमजोर होती है।

- Advertisement -
Ad image

पीएम मोदी ने क्या अपील की?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से कम-से-कम एक साल तक सोने की खरीद टालने की अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने पेट्रोल की खपत कम करने, गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने, वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा देने और स्वदेशी उत्पादों के इस्तेमाल पर जोर दिया। सरकार ने इसे वैश्विक अस्थिरता के दौर में “आर्थिक राष्ट्रवाद” और “राष्ट्रीय जिम्मेदारी” का हिस्सा बताया है।

राजनीति भी गरमाई

प्रधानमंत्री की अपील के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव भी तेज हो गया है। कर्नाटक भाजपा नेता और विपक्ष के नेता आर अशोक ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि जब इंदिरा गांधी ने 1967 में यही बात कही थी, तब उसे “राष्ट्रीय अनुशासन” कहा गया था। वहीं 2013 में तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने भी लोगों से सोना खरीदने के प्रलोभन से बचने की अपील की थी, जिसे “आर्थिक जिम्मेदारी” बताया गया। उन्होंने कहा कि अब पीएम मोदी की अपील पर कांग्रेस इसे मुद्दा बना रही है।

राहुल गांधी का हमला

वहीं कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जनता से त्याग मांगना सरकार की विफलता का संकेत है।

राहुल गांधी ने कहा:
“कल मोदी जी ने जनता से कहा — सोना मत खरीदो, विदेश मत जाओ, पेट्रोल कम इस्तेमाल करो, तेल और खाद कम उपयोग करो, मेट्रो से चलो, वर्क फ्रॉम होम करो। ये उपदेश नहीं, बल्कि विफलता के सबूत हैं।”

सोना क्यों बन जाता है आर्थिक चिंता?

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सोना केवल निवेश या आभूषण नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक भावना से भी जुड़ा है। लेकिन आर्थिक संकट, तेल कीमतों में उछाल और विदेशी मुद्रा पर दबाव के समय सोना सरकारों के लिए रणनीतिक आर्थिक मुद्दा बन जाता है।1967 और 2026 की परिस्थितियों की तुलना यह दिखाती है कि अलग-अलग दौर की सरकारें आर्थिक दबाव के समय जनता से त्याग और संयम की अपील करती रही हैं।

Share This Article