कोलकाता में सियासी भूचाल: अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों पर कसा शिकंजा, 24 ठिकानों के रिकॉर्ड खंगाल रहा नगर निगम!

अभिषेक बनर्जी की 24 संपत्तियों पर नगर निगम की टेढ़ी नजर, 'लीप्स एंड बाउंड्स' कनेक्शन को लेकर भाजपा-टीएमसी में वार-पलटवार।

Johar News Times
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पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की कथित संपत्तियों को लेकर जांच एजेंसियों और प्रशासन की सक्रियता अचानक बढ़ गई है। ताजा दावों के मुताबिक, कोलकाता नगर निगम के अधिकारी अभिषेक बनर्जी और उनके परिवार से जुड़े करीब दो दर्जन ठिकानों के रिकॉर्ड की गहन जांच कर रहे हैं।

24 ठिकानों की सूची और ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ का कनेक्शन

सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, जांच के दायरे में आई इन 24 संपत्तियों में कई बड़े व्यावसायिक और आवासीय ठिकाने शामिल हैं। इस पूरे मामले में ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ नामक एक निजी कंपनी की भूमिका भी जांच के केंद्र में है, जिसका सीधा संबंध कथित तौर पर अभिषेक बनर्जी से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, अभी तक इन प्रशासनिक दावों की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

कोलकाता नगर निगम के सूत्रों के अनुसार, निगम के इंजीनियर और एसेसमेंट विभाग पिछले कुछ दिनों से इन संपत्तियों के म्यूटेशन, टैक्स और मालिकाना हक के दस्तावेजों को खंगाल रहे हैं। उच्च स्तर से मिले निर्देशों के बाद, यह सारी जानकारी अब भवन निर्माण विभाग को सौंप दी गई है। विभाग अब इस बात की तफ्तीश कर रहा है कि इन आलीशान इमारतों और व्यावसायिक परिसरों के निर्माण के लिए जरूरी नक्शे और कानूनी मंजूरियां ली गई थीं या नहीं।

इस प्रशासनिक हलचल के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी चरम पर पहुंच गई है। राज्य के नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने एक सार्वजनिक मंच से दावा किया है कि उन्हें ‘लीप्स एंड बाउंड्स’ कंपनी और अभिषेक बनर्जी की संपत्तियों से जुड़ी कुछ गुप्त फाइलें मिली हैं। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि इस सूची में शामिल सभी संपत्तियों के खिलाफ जल्द ही बड़ी कार्रवाई देखने को मिलेगी।

दूसरी तरफ, टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने इसे पूरी तरह से ‘राजनीति से प्रेरित’ और केंद्रीय इशारों पर की जा रही कार्रवाई बताया है। बनर्जी का कहना है कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे सभी दावे पूरी तरह तथ्यहीन हैं और आगामी चुनावों या राजनीतिक लाभ के लिए उन्हें बदनाम करने की साजिश रची जा रही है।

फिलहाल, कोलकाता नगर निगम के रिकॉर्ड्स और नक्शों की जांच जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, उसने यह साफ कर दिया है कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति का पारा और अधिक चढ़ने वाला है।

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