फेयरनेस ट्रीटमेंट का सच: गोरा होने की चाहत कहीं छीन न ले चेहरे का नूर, जानें इसके 6 बड़े नुकसान

Johar News Times
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आजकल लड़का हो या लड़की, हर कोई खूबसूरत और चमकदार स्किन की चाहत रखता है। समाज में गोरेपन को खूबसूरती का पैमाना माने जाने के कारण मार्केट में तमाम तरह की फेयरनेस क्रीम और ट्रीटमेंट्स की बाढ़ आ गई है। लोग झटपट गोरा होने के लिए स्किन लाइटनिंग ट्रीटमेंट, केमिकल पील और लेजर थेरेपी का सहारा ले रहे हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शॉर्टकट में गोरा बनाने वाले ये फेयरनेस ट्रीटमेंट आपकी स्किन और ओवरऑल हेल्थ के लिए कितने खतरनाक साबित हो सकते हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे का कड़वा सच।

क्या होता है फेयरनेस ट्रीटमेंट?

फेयरनेस ट्रीटमेंट का मुख्य उद्देश्य त्वचा के पिगमेंटेशन (Melanin) को कम करके स्किन टोन को हल्का करना होता है। इसके लिए मुख्य रूप से चार तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है:

  • केमिकल पील : इसमें त्वचा की ऊपरी परत को हटाने के लिए एसिड का इस्तेमाल किया जाता है।
  • लेजर ट्रीटमेंट : मेलेनिन (त्वचा को रंग देने वाला तत्व) की परत को कम करने के लिए लेजर तकनीक का उपयोग होता है।
  • ब्लीचिंग एजेंट्स : त्वचा को गोरा करने के लिए हाइड्रोक्विनोन और स्टेरॉयड से भरपूर क्रीम्स का इस्तेमाल किया जाता है।
  • माइक्रोडर्माब्रेशन : यह स्किन को डीप एक्सफोलिएट करके नई परत को बाहर लाने की एक प्रक्रिया है।

फेयरनेस ट्रीटमेंट के 6 गंभीर खतरे

यदि आप भी ऐसा कोई ट्रीटमेंट लेने की सोच रहे हैं, तो इसके साइड इफेक्ट्स के बारे में जरूर जान लें:

1. स्किन की नेचुरल लेयर का डैमेज होना

इन ट्रीटमेंट्स में इस्तेमाल होने वाले हैश (Harsh) केमिकल्स और एसिड त्वचा की प्राकृतिक नमी और सुरक्षात्मक परत (Skin Barrier) को कमजोर कर देते हैं। इससे स्किन बेहद सेंसिटिव हो जाती है और धूप के संपर्क में आते ही झुलसने लगती है।

2. स्किन कैंसर का खतरा

कई फेयरनेस क्रीम्स में हाइड्रोक्विनोन, मर्करी (पारा) और स्टेरॉयड जैसी खतरनाक चीजें पाई जाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, लंबे समय तक इन केमिकल्स का इस्तेमाल करने से स्किन कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

3. हॉर्मोनल असंतुलन

स्टेरॉयड युक्त क्रीम का लगातार इस्तेमाल शरीर के हॉर्मोन्स को बिगाड़ सकता है। इसके कारण चेहरे पर अचानक बहुत सारे मुंहासे , अनचाहे बाल उगना और तेजी से वजन बढ़ने जैसी समस्याएं शुरू हो सकती हैं।

4. हाइपरपिगमेंटेशन

गोरा होने की चाहत में कई बार इसका उल्टा असर भी देखने को मिलता है। ट्रीटमेंट के साइड इफेक्ट के रूप में त्वचा के कुछ हिस्से अत्यधिक काले या गहरे रंग के हो जाते हैं, जिससे चेहरा पैची और अजीब दिखने लगता है।

5. गंभीर स्किन इंफेक्शन

केमिकल पील और लेजर थेरेपी के बाद त्वचा की बाहरी सुरक्षा परत पूरी तरह हट जाती है। इस संवेदनशील स्थिति में बैक्टीरिया और फंगस आसानी से त्वचा पर हमला कर देते हैं, जिससे गंभीर इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

6. वक्त से पहले बुढ़ापा और झुर्रियां

फेयरनेस ट्रीटमेंट्स में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक केमिकल त्वचा के लचीलेपन (Elasticity) को खत्म कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि कम उम्र में ही चेहरे पर झुर्रियां और झाइयां नजर आने लगती हैं और उम्र बड़ी दिखने लगती है।

खूबसूरती का संबंध त्वचा के रंग से नहीं, बल्कि उसकी सेहत से है। किसी भी विज्ञापन के बहकावे में आकर अपनी त्वचा पर खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल न करें। अगर कोई ट्रीटमेंट कराना भी है, तो केवल किसी सर्टिफाइड डर्मेटोलॉजिस्ट की सलाह पर ही लें।

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