आजकल बिगड़ते लाइफस्टाइल और तनाव के कारण दिल से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अक्सर लोगों को तब तक अपने दिल की हालत का अंदाजा नहीं होता, जब तक कि उनकी धमनियों (Arteries) में 70% तक ब्लॉकेज न हो जाए। शुरुआती संकेतों को हल्के में लेना या नजरअंदाज करना आगे चलकर हार्ट अटैक जैसी जानलेवा स्थिति का कारण बन सकता है।
समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और सही जांच करवाना ही बचाव का सबसे बड़ा उपाय है। आइए जानते हैं इसके शुरुआती लक्षण और सटीक जांच के बारे में।
हार्ट ब्लॉकेज के मुख्य शुरुआती लक्षण
जब दिल तक खून और ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने लगती है, तो शरीर ये संकेत देने लगता है:
- सीने में दर्द या भारीपन: छाती में लगातार दबाव, जकड़न या भारीपन महसूस होना।
- बाएं हाथ में दर्द: दर्द का सीने से उठकर बाएं हाथ, कंधे या गर्दन तक जाना और सुन्नपन महसूस होना।
- सांस फूलना: थोड़ा सा चलने, सीढ़ियां चढ़ने या हल्की मेहनत करने पर ही सांस उखड़ने लगना।
- मेहनत करने पर भारीपन: सामान्य गतिविधियों के दौरान भी शरीर में भारीपन और असहजता महसूस होना।
- अत्यधिक थकान और कमजोरी: बिना किसी भारी काम या कसरत के भी हर समय थका हुआ महसूस करना।
कब गंभीर हो जाती है स्थिति?
हार्ट ब्लॉकेज के लक्षण सबसे ज्यादा तब उभरते हैं जब धमनियों में रुकावट 70% या उससे अधिक हो जाती है। अगर आपको:
- तेज चलने, दौड़ने या सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलने के कारण रुकना पड़ता है।
- रुकने या आराम करने पर लक्षण थोड़े कम हो जाते हैं।
आराम करने पर दर्द या सांस फूलना भले ही ठीक हो जाए, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि बीमारी खत्म हो गई है। यह इस बात का साफ संकेत है कि दिल में ब्लॉकेज काफी बढ़ चुका है।
इस ‘एक टेस्ट’ से तुरंत चलता है ब्लॉकेज का पता
यदि आपको ऊपर दिए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस होता है, तो तुरंत कार्डियोलॉजिस्ट (दिल के डॉक्टर) से संपर्क करना चाहिए। हार्ट ब्लॉकेज की सटीक स्थिति जानने के लिए सबसे भरोसेमंद टेस्ट है:
एंजियोग्राफी (Angiography)
- क्या है यह टेस्ट: यह धमनियों का एक विशेष प्रकार का X-ray टेस्ट होता है।
- कैसे काम करता है: टेस्ट के दौरान डॉक्टर धमनियों में एक खास मेडिकल डाई (रंग) इंजेक्ट करते हैं।
- फायदा: इस डाई की मदद से X-ray स्क्रीन पर साफ दिख जाता है कि धमनियों में ब्लॉकेज कहां-कहां है और कितने प्रतिशत है।
समय पर इलाज ही एकमात्र बचाव
एंजियोग्राफी की रिपोर्ट के आधार पर ही डॉक्टर यह तय करते हैं कि ब्लॉकेज को दवाइयों से ठीक किया जा सकता है या इसके लिए एंजियोप्लास्टी (स्टेंट डालना) या बाईपास सर्जरी की जरूरत है। दिल के मामलों में देरी भारी पड़ सकती है, इसलिए सतर्क रहें और लक्षणों को पहचानकर तुरंत जांच करवाएं।
