झारखंड का पलामू जिला, जो कभी नक्सल गतिविधियों के कारण सुर्खियों में रहता था, अब विकास और औद्योगिक समृद्धि की नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। पांकी अंचल के मौजा भांग परसिया क्षेत्र में क्रिटिकल मिनरल्स ग्रेफाइट का बड़ा भंडार मिलने से पूरे इलाके में उत्साह का माहौल है। खान एवं भूतत्व विभाग की शुरुआती जांच में यहां उच्च प्रतिशत कार्बन युक्त ग्रेफाइट मिलने की संभावना जताई गई है। हालांकि विभाग का कहना है कि अंतिम पुष्टि राजकीय भूतात्विक प्रयोगशाला की रिपोर्ट आने के बाद ही की जाएगी।
भारत सरकार की ‘क्रिटिकल मिनरल्स’ सूची में शामिल है ग्रेफाइट
गौरतलब है कि भारत सरकार ने वर्ष 2023 में देश की अर्थव्यवस्था, रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए 30 महत्वपूर्ण खनिजों की सूची जारी की थी। इसमें लिथियम, कोबाल्ट, निकल, तांबा, ग्रेफाइट, दुर्लभ पृथ्वी तत्व और टाइटेनियम जैसे खनिज शामिल हैं। केंद्र सरकार के गजट के अनुसार ये खनिज उच्च तकनीकी उद्योगों के लिए बेहद आवश्यक माने जाते हैं।
ग्रेफाइट विशेष रूप से इलेक्ट्रिक वाहनों में इस्तेमाल होने वाली लिथियम आयन बैटरियों, स्मार्टफोन, लैपटॉप और कई आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों के निर्माण में उपयोग किया जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि विद्युत का सुचालक और ताप का कुचालक होने के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।
विभाग ने एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में की ड्रिलिंग
जानकारी के मुताबिक, ग्रेफाइट की संभावना को देखते हुए खान एवं भूतत्व निदेशालय ने पिछले वित्तीय वर्ष में इस क्षेत्र में अन्वेषण की स्वीकृति दी थी। इसके बाद सहायक निदेशक राकेश रौशन पन्ना के नेतृत्व में करीब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में आठ केंद्र चिन्हित कर लगभग 700 मीटर तक ड्रिलिंग की गई।
शुरुआती चरण में तकनीकी दिक्कतें सामने आईं, लेकिन जैसे-जैसे टीम गहराई तक पहुंची, वैसे-वैसे सकारात्मक संकेत मिलने लगे। विभागीय अधिकारियों के अनुसार ड्रिलिंग के दौरान मिले नमूनों ने टीम की उम्मीदें बढ़ा दीं।
उप निदेशक ने किया फील्ड विजिट, टीम को दी बधाई
खनिज मिलने की सूचना के बाद उप निदेशक राजेंद्र उरांव ने भी क्षेत्र का दौरा किया और टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। अब विभागीय प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद संबंधित ब्लॉक तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इसके बाद भारत सरकार स्तर पर नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
अधिकारियों का मानना है कि यदि खनन कार्य शुरू होता है तो पलामू और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलने की उम्मीद है।
सतबरवा के चांपी टू प्रोजेक्ट को भी मिली मंजूरी
पलामू के सतबरवा स्थित चांपी क्षेत्र में पहले ही उच्च गुणवत्ता वाले ग्रेफाइट की पुष्टि हो चुकी है। अब भूतत्व निदेशालय ने “चांपी टू प्रोजेक्ट” के अन्वेषण को भी हरी झंडी दे दी है। यह पूरा क्षेत्र करीब 500 हेक्टेयर में फैला हुआ है।

जानकारी के अनुसार इस क्षेत्र में मिले ग्रेफाइट में कार्बन की मात्रा 7 प्रतिशत से 24 प्रतिशत तक पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रसंस्करण के बाद इसे लगभग 100 प्रतिशत शुद्धता तक पहुंचाया जा सकता है।
चीन पर निर्भरता घटाने में मिल सकती है बड़ी मदद
हालांकि भारत के कई राज्यों — जैसे झारखंड, कर्नाटक, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में ग्रेफाइट के भंडार मौजूद हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय उद्योग अब तक चीन से आयातित ग्रेफाइट पर काफी हद तक निर्भर रहे हैं।
ऐसे में पलामू में बड़े पैमाने पर ग्रेफाइट खनन शुरू होने से भारत की आयात निर्भरता कम हो सकती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह खोज न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
सतबरवा के चांपी के बाद अब पांकी के भांग परसिया में उच्च कोटि के ग्रेफाइट का बड़ा निक्षेप मिला है। ड्रिलिंग से प्राप्त खनिज के नमूने को जांच के लिए हजारीबाग स्थित राजकीय प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट के बाद निदेशालय स्तर से प्राप्त निर्देश के आलोक में अग्रतेर कार्रवाई की जाएगी।
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