झारखंड के गढ़वा जिले में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे निजी अस्पतालों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। शुक्रवार को सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने औचक निरीक्षण कर अवैध रूप से संचालित हो रहे अस्पतालों की पोल खोल दी। छापेमारी के दौरान जो हकीकत सामने आई वह चौंकाने वाली थी—कई अस्पतालों में गंभीर मरीज भर्ती थे, लेकिन उनका इलाज करने वाला कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।
कहाँ क्या मिला?
सिविल सर्जन की टीम ने शहर के विभिन्न हिस्सों में छापेमारी की, जिसमें निम्नलिखित अस्पतालों की लापरवाही उजागर हुई:
- यहाँ न तो कोई डॉक्टर मिला और न ही कोई मरीज। अस्पताल की व्यवस्था पूरी तरह से चरमराई हुई पाई गई।
- यहाँ छत्तीसगढ़ की एक महिला मरीज भर्ती थी, लेकिन डॉक्टर नदारद थे। नर्स ने सिविल सर्जन को झूठ बोलकर गुमराह करने की कोशिश की कि सरकारी डॉक्टर मरीज को देख कर गए हैं, जिसका खुलासा फोन पर हुई बातचीत में तुरंत हो गया।
- यहाँ सिजेरियन ऑपरेशनकराई गई महिला भर्ती थी, लेकिन देखभाल के लिए कोई विशेषज्ञ चिकित्सक मौके पर नहीं था।
- यहाँ लापरवाही की हद पार हो गई। अस्पताल में 5 सिजेरियन मरीज भर्ती थे, पर एक भी डॉक्टर मौजूद नहीं था। सिविल सर्जन ने इसे “गंभीर लापरवाही” मानते हुए तत्काल अस्पताल बंद करने और मरीजों को सदर अस्पताल शिफ्ट करने का आदेश दिया।
सरकारी डॉक्टरों की भूमिका भी जांच के घेरे में
जांच के दौरान यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि कई निजी अस्पतालों में सरकारी डॉक्टर (डॉ. कुश कुमार और डॉ. मनोज दास) अपनी सेवाएं दे रहे हैं। सिविल सर्जन ने इन डॉक्टरों से ‘शो-कॉज’ पूछने का निर्देश दिया है कि यदि वे निजी केंद्रों पर ऑपरेशन कर रहे हैं, तो सरकारी अस्पताल में अपनी ड्यूटी कब पूरी करते हैं।
“बिना मानक अस्पताल चलाया तो होंगे सील”
सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ केनेडी ने कड़े लहजे में चेतावनी देते हुए कहा:
“मरीजों की जान से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं होगा। जिनके पास पर्याप्त डॉक्टर और निर्धारित मानक नहीं हैं, वे स्वेच्छा से अस्पताल बंद कर दें, अन्यथा विभाग उन्हें सील कर कड़ी कानूनी कार्रवाई करेगा।”










