बंगाल में भगवा सूर्योदय: शुभेंदु अधिकारी ने ली मुख्यमंत्री पद की शपथ, परेड ग्राउंड में PM मोदी के सामने रचा इतिहास।

बंगाल में 'अधिकारी' राज: ममता युग का अंत, शुभेंदु का शंखनाद।

Johar News Times
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में आज 9 मई, 2026 का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। कोलकाता के ऐतिहासिक ब्रिगेड परेड ग्राउंड में आयोजित एक भव्य समारोह में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। राज्यपाल आर. एन. रवि ने उन्हें पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित देश के कई कद्दावर नेता इस ऐतिहासिक पल के गवाह बने।

प्रधानमंत्री की मौजूदगी में ‘शक्ति प्रदर्शन’ शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विशेष रूप से शामिल हुए। उनके मंच पर पहुँचते ही पूरा परेड ग्राउंड ‘जय श्री राम’ और ‘वंदे मातरम’ के नारों से गूंज उठा। प्रधानमंत्री के साथ मंच पर कई राज्यों के मुख्यमंत्री भी मौजूद रहे, जिनमें सिक्किम के प्रेम सिंह तमांग, अरुणाचल के पेमा खांडू, त्रिपुरा के मानिक साहा और नगालैंड के नेफियू रियो प्रमुख थे। इसके अलावा महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और राजस्थान की उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने भी शिरकत की।

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भवानीपुर के ‘जायंट किलर’ अब राज्य के सारथी शुभेंदु अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना उनके राजनीतिक सफर का सबसे बड़ा मुकाम है। हालिया विधानसभा चुनाव में उन्होंने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को उनके ही गढ़ भवानीपुर में 15,000 से अधिक मतों से हराकर सबको चौंका दिया था। भाजपा ने राज्य की 294 सीटों में से 207 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर ममता बनर्जी के 15 साल के शासन को उखाड़ फेंका, जबकि टीएमसी मात्र 80 सीटों पर सिमट गई।

विधायक दल का सर्वसम्मत फैसला शपथ ग्रहण से पहले 8 मई को कोलकाता में अमित शाह की मौजूदगी में हुई विधायक दल की बैठक में शुभेंदु अधिकारी के नाम पर मुहर लगी थी। शाह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी नवनिर्वाचित विधायकों ने सर्वसम्मति से स्वीकार किया।

ममता बनर्जी को न्योता लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए भाजपा ने निवर्तमान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी इस समारोह के लिए आमंत्रित किया था। हालांकि, कड़वाहट भरे चुनाव प्रचार के बाद उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही।

यह केवल एक नई सरकार का गठन नहीं है, बल्कि बंगाल की जनता द्वारा बदलाव की उस पुकार का परिणाम है जिसने राज्य की राजनीतिक दिशा को पूरी तरह बदल दिया है।

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