CBSE 12वीं के कम अंकों से JEE aspirants की उम्मीदों पर असर, IIT-NIT एडमिशन को लेकर बढ़ी चिंता; बोर्ड ने दी सफाई

CBSE 12वीं के कम अंकों से JEE aspirants की उम्मीदों पर असर, IIT-NIT एडमिशन को लेकर बढ़ी चिंता; बोर्ड ने दी सफाई

Johar News Times
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सीबीएसई 12वीं के इस साल के परिणामों के बाद जेईई और इंजीनियरिंग प्रवेश की तैयारी कर रहे छात्रों में चिंता बढ़ गई है। कई छात्रों के कम अंक आने के बाद IIT, NIT और IIIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में प्रवेश की उम्मीदों को झटका लगा है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर बहस तेज हो गई है। इस साल सीबीएसई 12वीं में पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 प्रतिशत कम विद्यार्थी पास हुए हैं। इसके अलावा 90 और 95 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या में भी गिरावट दर्ज की गई है।

OSM सिस्टम पर छात्रों के आरोप

सीबीएसई ने इस वर्ष लगभग 98 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन पहली बार ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम के जरिए डिजिटल तरीके से किया। इसके बाद कई छात्रों ने आरोप लगाया कि डिजिटल मूल्यांकन के कारण उन्हें अपेक्षित अंक नहीं मिले। छात्रों का कहना है कि कई मामलों में उत्तर सही होने के बावजूद पूरे अंक नहीं दिए गए, खासकर तब जब उत्तर में सभी स्टेप्स स्पष्ट रूप से नहीं लिखे गए थे। वहीं कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि स्कैनिंग की गुणवत्ता के कारण कॉपियों का मूल्यांकन प्रभावित हुआ।

साइंस विषयों में कम टॉप स्कोरर

आंकड़ों के अनुसार इस बार साइंस विषयों में 100 में 100 अंक पाने वाले छात्रों की संख्या बेहद कम रही।

  • गणित में 1283 छात्र
  • रसायन विज्ञान में 1061 छात्र
  • भौतिकी में केवल 96 छात्र
    पूरी तरह 100 अंक प्राप्त कर सके।

इसके मुकाबले कला और स्किल आधारित विषयों में अधिक छात्रों ने पूर्ण अंक प्राप्त किए, जैसे पेंटिंग में 15,334 और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में 3,326 छात्रों ने 100 अंक हासिल किए।

IIT-NIT एडमिशन पर असर

आईआईटी, एनआईटी और ट्रिपल आईटी जैसे संस्थानों में प्रवेश के लिए सामान्य वर्ग के छात्रों को 12वीं में कम से कम 75 प्रतिशत अंक या टॉप 20 पर्सेंटाइल में होना आवश्यक होता है। इस बार कई छात्र जेईई मेन में अच्छे पर्सेंटाइल (80 से 99 तक) लाने के बावजूद 12वीं में 75 प्रतिशत का आंकड़ा पार नहीं कर पाए, जिससे उनकी जोसा (JoSAA) काउंसलिंग में भागीदारी प्रभावित हुई है।

विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का मानना है कि जेईई और नीट की तैयारी करने वाले छात्र मुख्य रूप से MCQ और शॉर्ट ट्रिक्स पर ध्यान देते हैं, जबकि बोर्ड परीक्षा में उत्तर को विस्तार से और स्टेप-वाइज लिखना आवश्यक होता है। इस अंतर के कारण भी अंकों में गिरावट देखी गई है।

CBSE का जवाब

सीबीएसई ने इन सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली पूरी तरह पारदर्शी, निष्पक्ष और समान अवसर आधारित है। बोर्ड ने कहा कि OSM का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक वस्तुनिष्ठ और सटीक बनाना है। सीबीएसई ने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों को उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त करने, अंक सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन का पूरा अवसर दिया जाता है।

आवेदन प्रक्रिया शुरू

सीबीएसई ने बताया कि विद्यार्थी 19 से 22 मई तक अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी, रीचेकिंग और पुनर्मूल्यांकन के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद किसी भी आवेदन को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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