कैंसर आज के समय की सबसे गंभीर और खतरनाक बीमारियों में से एक है। ग्लोबल कैंसर ऑब्जरवेटरी के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में हर साल लगभग 1.90 करोड़ लोग इस जानलेवा बीमारी की चपेट में आते हैं। इस सूची में चीन और अमेरिका के बाद भारत तीसरे स्थान पर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मुताबिक, हर साल करीब 1 करोड़ लोग कैंसर के कारण अपनी जान गंवा देते हैं।
हालांकि, डॉक्टर मानते हैं कि अगर सही समय पर इसकी पहचान हो जाए, तो इलाज मुमकिन है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या कैंसर सेल्स को शरीर से पूरी तरह खत्म किया जा सकता है? आइए जानते हैं कि इलाज के बाद भी ये खतरनाक सेल्स शरीर में क्यों बच जाते हैं और इनसे निपटने के आधुनिक तरीके क्या हैं।
आखिर क्या हैं कैंसर कोशिकाएं (Cancer Cells) और ये कितनी खतरनाक हैं?
हमारा शरीर अरबों कोशिकाओं (Cells) से मिलकर बना है। सामान्य तौर पर ये कोशिकाएं एक निश्चित नियम और पैटर्न के तहत बढ़ती हैं, बूढ़ी होती हैं और फिर खुद ही नष्ट हो जाती हैं। इनकी जगह नई और स्वस्थ कोशिकाएं ले लेती हैं।
कैंसर होने पर कोशिकाओं का यह नेचुरल कंट्रोल सिस्टम पूरी तरह नष्ट हो जाता है। इसके बाद ये कोशिकाएं बिना रुके, अनियंत्रित तरीके से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
सफल इलाज के बाद भी क्यों दोबारा लौट आता है कैंसर?
कैंसर किस अंग में है और कितना फैल चुका है, इस आधार पर इसे 4 स्टेज में बांटा जाता है। बीमारी का पता जितनी जल्दी चले, मरीज के ठीक होने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। लेकिन कई मामलों में देखा गया है कि पूरी तरह ठीक होने के बाद भी कैंसर दोबारा उभर आता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- तेजी से विभाजन: कैंसर सेल्स बहुत तेजी से अपनी संख्या बढ़ाती हैं।
- इम्यून सिस्टम को धोखा देना: ये कोशिकाएं इतनी चालाक होती हैं कि हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System) इन्हें पहचान नहीं पाती और इन पर हमला नहीं कर पाती।
- छिपे हुए सेल्स: इलाज (जैसे कीमो या सर्जरी) के दौरान लाखों सेल्स तो मर जाते हैं, लेकिन कुछ बेहद सूक्ष्म सेल्स शरीर के किसी कोने (जैसे ब्लड, ब्रेन या बोन) में छिपे रह जाते हैं, जो बाद में जाकर दोबारा सक्रिय हो जाते हैं।
कैंसर को खत्म करने के पारंपरिक तरीके
फिलहाल मेडिकल साइंस में कैंसर से लड़ने के लिए मुख्य रूप से चार तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है:
- कीमोथेरेपी (Chemotherapy): इसमें हैवी दवाओं के जरिए तेजी से बढ़ रही कैंसर कोशिकाओं को नष्ट किया जाता है।
- रेडियोथेरेपी (Radiotherapy): इस तकनीक में हाई-एनर्जी रेडिएशन (किरणों) का उपयोग करके ट्यूमर को सिकोड़ा और सेल्स को खत्म किया जाता है।
- सर्जरी (Surgery): इस प्रक्रिया में डॉक्टर ऑपरेशन के जरिए कैंसर से प्रभावित हिस्से या ट्यूमर को शरीर से बाहर निकाल देते हैं।
- इम्यूनोथेरेपी (Immunotherapy): यह एक आधुनिक तरीका है जो मरीज के खुद के इम्यून सिस्टम (प्रतिरक्षा प्रणाली) को इतना मजबूत बना देता है कि वह कैंसर सेल्स को ढूंढकर खुद खत्म करने लगती है।
भविष्य की उम्मीद: कैंसर के इलाज की 3 नई और आधुनिक तकनीकें
मेडिकल साइंस अब कैंसर को जड़ से मिटाने के लिए कई नई तकनीकों पर काम कर रहा है, जो पारंपरिक तरीकों से ज्यादा सटीक और असरदार हैं:
- जीन थेरेपी (Gene Therapy): इस तकनीक के जरिए कैंसर कोशिकाओं के डीएनए या जीन में ही बदलाव कर दिया जाता है, जिससे उनकी बढ़ने की क्षमता खत्म हो जाती है।
- स्टेम सेल थेरेपी (Stem Cell Therapy): इसमें क्षतिग्रस्त या बीमार कोशिकाओं को स्वस्थ स्टेम सेल्स से बदला जाता है, जो कैंसर से लड़ने में मदद करती हैं।
- नैनोटेक्नोलॉजी (Nanotechnology): यह बेहद सूक्ष्म नैनोपार्टिकल्स (Micro Particles) पर आधारित तकनीक है। इसके जरिए दवा सीधे सिर्फ कैंसर प्रभावित सेल्स तक पहुंचाई जाती है, जिससे शरीर के बाकी स्वस्थ हिस्सों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता।
