जमशेदपुर में वट सावित्री पूजा की धूम: सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, वट वृक्ष की परिक्रमा कर मांगी पति की दीर्घायु

अखंड सौभाग्य की कामना: जमशेदपुर में वट सावित्री की धूम, सुहागिनों ने बरगद की छांव में रचाई आस्था।

Johar News Times
2 Min Read

बिष्टुपुर, साकची और कदमा समेत कई इलाकों में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने सुनी सावित्री-सत्यवान की कथा।


लौहनगरी जमशेदपुर में शुक्रवार को वट सावित्री पूजा के अवसर पर श्रद्धा और अटूट विश्वास का अनूठा संगम देखने को मिला। सुहागिन महिलाओं ने अपने पति की लंबी आयु, अखंड सौभाग्य और परिवार की सुख-समृद्धि के लिए ऐतिहासिक वट सावित्री का निर्जला व्रत रखा। सुबह से ही शहर के विभिन्न इलाकों में स्थित वट वृक्षों के नीचे पूजा-अर्चना के लिए महिलाओं का सैलाब उमड़ पड़ा।

पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाओं से गुलजार हुए मंदिर

सुबह के शुरुआती घंटों से ही लाल और पीले रंग के पारंपरिक परिधानों में सजी-धजी महिलाओं का मंदिरों और पूजा स्थलों पर पहुंचना शुरू हो गया था। शहर के बिष्टुपुर, साकची, कदमा, सोनारी और बर्मामाइंस जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सामूहिक पूजा का विशेष आयोजन किया गया। महिलाओं ने पूरी निष्ठा के साथ वट वृक्ष (बरगद के पेड़) की परिक्रमा की, उस पर कच्चा सूत लपेटा और फल-फूल अर्पित कर अपने सुहाग की रक्षा की कामना की।

श्रद्धापूर्वक सुनी गई सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा

पूजा के दौरान विभिन्न स्थलों पर पुरोहितों द्वारा सावित्री और सत्यवान की पौराणिक एवं प्रेरणादायक कथा सुनाई गई। व्रत रखने वाली महिलाओं ने हाथ में भीगे हुए चने लेकर बेहद श्रद्धापूर्वक इस कथा को सुना। मान्यता है कि इस कथा को सुनने से वैवाहिक जीवन के सभी संकट दूर हो जाते हैं।

स्थानीय पुजारी चंदन मिश्रा ने इस पर्व के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा:

“वट सावित्री व्रत भारतीय संस्कृति में पति-पत्नी के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, माता सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण हरने आए यमराज को अपने तपोबल और बुद्धिमानी से परास्त किया था। उन्होंने वट वृक्ष के नीचे ही तीन दिनों का कठोर निर्जला व्रत रखकर यमराज से सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। तभी से यह परंपरा चली आ रही है।

Share This Article