पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूह (PVTG) समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान के लिए बड़ा संतृप्तिकरण अभियान शुरू किया है। जिला जनसंपर्क कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार उपायुक्त राजीव रंजन के निर्देश पर 18 से 25 मई 2026 तक जिले के जनजातीय बहुल गांवों में विशेष जागरूकता, स्वास्थ्य जांच और लाभुक संतृप्तिकरण शिविर लगाए जा रहे हैं। यह अभियान भारत सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय और झारखंड सरकार के संयुक्त दिशा-निर्देशों के तहत चलाया जा रहा है, ताकि सुदूर जंगल और पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम जरूरतमंद परिवार तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाया जा सके।
19 से 25 मई तक चिन्हित गांवों में डॉक्टरों की टीम द्वारा मुफ्त स्वास्थ्य जांच, दस्तावेज सत्यापन और लाभुक पंजीकरण किया जा रहा है। 20 मई को ‘विलेज इमर्शन ड्राइव’ के तहत जिले के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, कर्मयोगी और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि गांवों में पहुंचकर पीवीटीजी परिवारों से सीधा संवाद करेंगे और उनकी समस्याओं का मौके पर आकलन करेंगे। 21 से 23 मई तक गांवों में विशेष जनसुनवाई और शिविर लगाए जाएंगे, जहां राशन, पेंशन और आवास से जुड़े लंबित मामलों का त्वरित निष्पादन किया जाएगा। 24 मई को प्रखंडवार प्रगति रिपोर्ट तैयार होगी, जबकि 25 मई को जमशेदपुर समाहरणालय में उपायुक्त राजीव रंजन सभी बीडीओ के साथ हाई लेवल डी-ब्रीफिंग बैठक करेंगे।
एक ही मंच पर मिलेंगी कई सरकारी योजनाएं
इस अभियान के तहत स्वास्थ्य जांच, आयुष्मान भारत गोल्डन कार्ड, राशन कार्ड, वृद्धावस्था व विधवा पेंशन, शिक्षा छात्रवृत्ति, पक्का आवास, शुद्ध पेयजल और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ एक ही मंच पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उपायुक्त राजीव रंजन ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO) और विभागीय अधिकारियों को सख्त निर्देश दिया है कि अभियान को पूरी संवेदनशीलता के साथ चलाया जाए और कोई भी पात्र परिवार योजनाओं से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि किसी पात्र परिवार को लाभ नहीं मिला तो संबंधित विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।
गांवों तक पहुंचेगा प्रशासन, बिचौलियों पर लगेगी रोक
जिला प्रशासन का मानना है कि यह अभियान केवल औपचारिकता नहीं बल्कि आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में वास्तविक बदलाव लाने की पहल है। अधिकारियों के गांवों में जाकर सीधे संवाद करने और समस्याओं का समाधान करने से बिचौलियों की भूमिका कम होगी और योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचेगा। प्रशासन को उम्मीद है कि इस पहल से घाटशिला, डुमरिया और अन्य सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले अंतिम सबर और पीवीटीजी परिवारों तक पक्का आवास, राशन और स्वास्थ्य सुविधाएं तेजी से पहुंच सकेंगी।
