पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा क्षेत्र में सुवर्णरेखा नदी के कड़ियामोहनपाल घाट से बालू के वैध खनन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया है। बनमाकड़ी पंचायत के रैयतों ने बालू परिवहन के लिए अपनी निजी जमीनों के उपयोग की अनुमति देते हुए गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड को अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) सौंप दिया है। रैयतों की सहमति मिलने के बाद अब क्षेत्र में बालू के वैध उठाव का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।
जानकारी के अनुसार, गोदावरी कमोडिटीज लिमिटेड ने अधिकतम बोली लगाकर इस बालू घाट की लीज हासिल की थी। इसके बाद ग्रामसभा की सहमति से लेकर जिला प्रशासन द्वारा लीज डीड से जुड़ी सभी कानूनी प्रक्रियाएं पहले ही पूरी कर ली गई थीं। हालांकि परिवहन मार्ग को लेकर रैयतों की सहमति नहीं मिलने से कार्य शुरू नहीं हो पा रहा था।
लीजधारक कंपनी के प्रतिनिधियों ने बताया कि अगले सप्ताह विधि-विधान और पूजा-अर्चना के बाद बालू खनन और परिवहन का कार्य औपचारिक रूप से शुरू कर दिया जाएगा। इस दौरान बनमाकड़ी पंचायत के मुखिया मनमथ देहरी, वृंदावनी के ग्राम प्रधान निरंजन माइती और आकाशछिड़ा के ग्राम प्रधान राधेश्याम माइती की मौजूदगी में रैयतों ने सरकारी और निजी जमीन के उपयोग को लेकर लिखित सहमति दी। स्थानीय लोगों का मानना है कि सुवर्णरेखा नदी से वैध बालू उठाव शुरू होने से क्षेत्र की आर्थिक स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है। इससे जहां सैकड़ों स्थानीय मजदूरों को गांव के पास ही रोजगार मिलेगा, वहीं ट्रैक्टर मालिकों और परिवहन कार्य से जुड़े लोगों के लिए भी आमदनी का स्थायी जरिया तैयार होगा।
ग्रामीणों के हितों की सुरक्षा और स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने को लेकर कंपनी ने ग्रामसभा के दौरान लिखित सहमति पत्र भी सौंपा है। प्रशासन का मानना है कि वैध खनन शुरू होने से अवैध बालू कारोबार पर भी रोक लगेगी और सरकार को राजस्व प्राप्त होगा। साथ ही इससे क्षेत्र के ग्रामीणों के जीवन स्तर में सुधार आने की उम्मीद जताई जा रही है।
