गर्मियों का सीजन आते ही लोग तेज धूप, पसीना और थकान से राहत पाने के लिए ‘इंस्टेंट कूलिंग’ यानी तुरंत ठंडक देने वाली चीजों की तरफ भागते हैं। ठंडा पानी, कोल्ड ड्रिंक्स, पैकेज्ड जूस और आइसक्रीम हर घर की जरूरत बन जाते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो चीजें जुबान को तुरंत ठंडक देती हैं, वे असल में आपके शरीर को नुकसान पहुंचा रही हैं?
कई तथाकथित ‘कूलिंग फूड्स’ डिहाइड्रेशन, डाइजेस्टिव इश्यू (पाचन की समस्याएं), मोटापा और डायबिटीज का रिस्क बढ़ाते हैं। आइए जानते हैं इन समर ड्रिंक्स और फूड्स का पूरा सच।
भ्रम बनाम हकीकत: जिन्हें आप कूलिंग फूड समझते हैं, उनका सच देखिए
कई ऐसे समर फूड और ड्रिंक्स हैं, जो ‘टेम्परेरी कूलिंग‘ का एहसास देते हैं। लेकिन ये बॉडी टेम्परेचर इम्बैलेंस, डिहाइड्रेशन, शुगर स्पाइक और पाचन संबंधी समस्याएं बढ़ाते हैं।
1. एनर्जी ड्रिंक्स
- हमें क्या लगता है: तुरंत एनर्जी और रिफ्रेशमेंट मिलता है। गर्मी में अच्छा कूलिंग ऑप्शन है और प्यास शांत हो जाती है।
- असल में क्या होता है: ब्लड शुगर तुरंत स्पाइक होता है और इंसुलिन तेजी से रिलीज होता है। इससे थोड़ी देर बाद एनर्जी क्रैश और थकान हो सकती है। इसमें मौजूद कैफीन से डिहाइड्रेशन हो सकता है। वहीं, कार्बन डाइऑक्साइड गैस से ब्लोटिंग, डकार और पेट फूलने की समस्या हो सकती है। हाई शुगर और कैफीन शरीर के इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस को प्रभावित कर सकते हैं।
2. स्पोर्ट्स ड्रिंक्स
- हमें क्या लगता है: हेल्दी और टेस्टी ड्रिंक है। एनर्जी बढ़ाता है और हाइड्रेशन देता है।
- असल में क्या होता है: इसमें मौजूद आर्टिफिशियल फ्लेवर और कलर शरीर पर केमिकल लोड बढ़ा सकते हैं। ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड इंग्रेडिएंट्स लिवर पर एक्स्ट्रा प्रेशर डाल सकते हैं। यह तेजी से ब्लड शुगर बढ़ाता है, जिससे इंसुलिन स्पाइक और फैट स्टोरेज बढ़ सकता है। लंबे समय में मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और अन्य मेटाबॉलिक डिसऑर्डर्स का रिस्क बढ़ता है।
3. सोडा / कार्बोनेटेड वॉटर
- हमें क्या लगता है: पेट हल्का रहेगा, तुरंत ठंडक मिलेगी, गर्मी में राहत देगा, डाइजेशन बेहतर होगा और हैवीनेस खत्म करेगा।
- असल में क्या होता है: कार्बन डाइऑक्साइड गैस पेट में ब्लोटिंग बढ़ाती है। एसिडिटी और रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। बार-बार लेने से डाइजेशन एंजाइम्स का बैलेंस बिगड़ सकता है। इसके अलावा, मिनरल एब्जॉर्प्शन (जैसे कैल्शियम) प्रभावित हो सकता है। अस्थायी राहत के बाद असहजता बढ़ती है।
4. पैकेज्ड फ्रूट जूस
- हमें क्या लगता है: फ्रूट बेस्ड है, इसलिए हेल्दी है। विटामिन्स की पूर्ति करता है और बच्चों के लिए अच्छा विकल्प है।
- असल में क्या होता है: इसमें एडेड शुगर/कंसंट्रेटेड शुगर ज्यादा होती है, जो इसे हाई कैलोरी ड्रिंक बनाती है। हाई शुगर कंटेंट के कारण ब्लड शुगर तेजी से बढ़ सकता है। प्रिजर्वेटिव्स और अल्ट्राप्रोसेसिंग से न्यूट्रिएंट्स कम हो जाते हैं। ज्यादा पीने से फैटी लिवर और मोटापे का रिस्क बढ़ता है।
5. सॉफ्ट ड्रिंक्स / कोल्ड ड्रिंक्स
- हमें क्या लगता है: गर्मी के लिए सस्ता कूलिंग ऑप्शन है। कभी-कभार लेने से नुकसान नहीं होता और बॉडी हाइड्रेटेड रखता है।
- असल में क्या होता है: इसमें मौजूद ‘हाई फ्रक्टोज कॉर्न सिरप’ शरीर में फैट स्टोरेज बढ़ा सकता है। मौजूद कैफीन डिहाइड्रेशन का रिस्क बढ़ा सकता है। सॉफ्ट ड्रिंक्स में मौजूद एसिड और हाई शुगर दांतों के इनेमल कमजोर कर सकते हैं। ज्यादा लेने से इंसुलिन रेजिस्टेंस का रिस्क बढ़ता है और कैफीन के कारण लत लग सकती है।
6. आइसक्रीम
- हमें क्या लगता है: शरीर को तुरंत ठंडक देती है, गर्मी में तुरंत राहत देती है और मूड अच्छा करती है।
- असल में क्या होता है: ब्लड शुगर लेवल तेजी से बढ़ सकता है। हाई शुगर और सैचुरेटेड फैट से कैलोरी ओवरलोड हो सकता है, जिससे मोटापे का रिस्क बढ़ता है। यह गले की म्यूकोसल लाइनिंग (गले की अंदरूनी प्रोटेक्टिव लेयर) को प्रभावित कर सकती है, जिससे गले में खराश और इन्फेक्शन का रिस्क बढ़ता है। हाई फैट और शुगर कंटेंट के कारण पाचन प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है।
7. फ्लेवर्ड योगर्ट
- हमें क्या लगता है: दही है, इसलिए कूलिंग और हेल्दी है। प्रोबायोटिक फायदा मिलेगा, हल्का-पौष्टिक है और वजन कंट्रोल में मदद करेगा।
- असल में क्या होता है: एडेड शुगर ज्यादा होती है, जिससे कैलोरी और शुगर इनटेक बढ़ सकता है। प्रोसेसिंग और शुगर इसका प्रोबायोटिक बैलेंस प्रभावित कर सकते हैं। इसमें मौजूद फ्लेवरिंग एजेंट्स और एडिटिव्स न्यूट्रिशनल क्वालिटी कम कर सकते हैं, जिससे अतिरिक्त कैलोरी और शुगर से वजन बढ़ सकता है।
आखिर ये चीजें शरीर को गर्म क्यों करती हैं?
जब हम बहुत ठंडी चीज खाते हैं, तो हमारे पेट का तापमान अचानक गिर जाता है। शरीर अपने कोर टेम्परेचर को मेंटेन करने के लिए उस हिस्से में ब्लड सर्कुलेशन बढ़ा देता है और ज्यादा एनर्जी बर्न करता है। इस प्रक्रिया में शरीर अंदर से और ज्यादा गर्म हो जाता है। यानी जिसे आप कूलिंग समझ रहे हैं, वो असल में बॉडी को अंदर से हीट कर रहा है।
गर्मियों में खाने से जुड़ी क्या सावधानियां बरतनी चाहिए?
- नेचुरल ऑप्शन्स चुनें: पैकेज्ड और प्रिजर्वेटिव वाले ड्रिंक्स की जगह मटके का पानी, ताजी छाछ, लस्सी, सत्तू का शर्बत, नींबू पानी या नारियल पानी पिएं।
- हल्का भोजन करें: गर्मी में शरीर की पाचक अग्नि (डाइजेशन) पहले ही धीमी होती है, इसलिएवी फैट और हाई शुगर वाली चीजों से बचें।
- गले का ध्यान रखें: तेज धूप से सीधे आकर तुरंत बर्फ का पानी या आइसक्रीम न खाएं, इससे थर्मल शॉक लगता है और गला खराब हो जाता है।
