चाईबासा: ‘रेड कॉरिडोर’ से ‘ग्रीन कॉरिडोर’ की ओर बढ़ता सारंडा, 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा का नेटवर्क ध्वस्त; 20 नक्सली सरेंडर की कतार में

लाल आतंक का अंत: सारंडा में बिखर गया 1 करोड़ के इनामी मिसिर बेसरा का साम्राज्य, 20 नक्सली जल्द करेंगे सरेंडर।

Johar News Times
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कभी देश के सबसे खतरनाक “रेड कॉरिडोर” के रूप में पहचाना जाने वाला सारंडा जंगल अब तेजी से शांति और विकास यानी “ग्रीन कॉरिडोर” की राह पर बढ़ रहा है। सुरक्षाबलों के लगातार बढ़ते दबाव, बड़े ऑपरेशन्स और ताबड़तोड़ मुठभेड़ों के बाद नक्सलियों की कमर पूरी तरह टूट चुकी है। खबर है कि भाकपा माओवादी के शीर्ष नेता और 1 करोड़ रुपये के इनामी कुख्यात नक्सली मिसिर बेसरा का नेटवर्क अब पूरी तरह बिखर गया है।

विश्वस्त सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियों के कड़े रुख के बाद मिसिर बेसरा के दस्ते में भगदड़ की स्थिति बन गई है। जंगल में चौतरफा घेराबंदी से घबराकर 20 से अधिक सक्रिय नक्सली अब मुख्यधारा में लौटने की तैयारी कर रहे हैं।

सुरक्षा एजेंसियों के संपर्क में आए नक्सलियों में कई बड़े और सक्रिय नाम शामिल हैं, जिनमें मुख्य रूप से:

  • सागेन अंगरिया, गुलशन मुंडा, प्रभात मुखिया
  • जयंती, बसुमती, दर्शन, सुलेमान
  • किशोर, मुकेश, करण टियू, मुनीराम
  • बिरसा, दामू पड़ेया, लादू तिरिया
  • बैजनाथ, सुनीता और बसंती शामिल हैं।

ये सभी नक्सली जल्द ही औपचारिक रूप से आत्मसमर्पण कर सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक, झारखंड पुलिस मुख्यालय के स्तर पर इनके सरेंडर को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं।

सारंडा छोड़ भागा 1 करोड़ का इनामी मिसिर बेसरा

सुरक्षा एजेंसियों का दावा है कि सुरक्षाबलों के लगातार चक्रव्यूह और बढ़ते दबाव के कारण एक करोड़ का इनामी नक्सली मिसिर बेसरा भी सारंडा का इलाका छोड़कर भाग चुका है। हालांकि, जिस तरह से उसका नेटवर्क टूट रहा है और पकड़ कमजोर हुई है, उसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को उम्मीद है कि वह भी जल्द ही आत्मसमर्पण करने को मजबूर हो सकता है।

संयुक्त ऑपरेशन्स ने तोड़ी नक्सलियों की कमर

सारंडा में आई इस बड़ी तब्दीली के पीछे सुरक्षाबलों की संयुक्त और रणनीतिक कार्रवाई है। पिछले कई महीनों से झारखंड पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल और झारखंड जगुआर की संयुक्त टीमें सारंडा के घने जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन और एंटी-नक्सल अभियान चला रही हैं। सुरक्षाबलों की इसी आक्रामक रणनीति ने नक्सलियों के हौसले पस्त कर दिए हैं, जिससे अब सारंडा में लाल आतंक का खात्मा तय माना जा रहा है।

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