बिहार के बांका जिले के चांदन प्रखंड स्थित पिंड़रा गांव के मोहन यादव और राकेश यादव ने संघर्ष और मेहनत के दम पर स्वरोजगार में वैश्विक पहचान बनाई है। दोनों भाइयों ने बिहार और झारखंड में 32 से अधिक शाखाएं स्थापित की हैं और 2000 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं। वर्ष 2025 में हेयर कलरिंग के क्षेत्र में वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाकर उन्होंने गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी अपना नाम दर्ज कराया।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
बचपन में ही पिता पैरू उर्फ परमेश्वर यादव के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी दोनों भाइयों पर आ गई। आर्थिक तंगी के कारण मोहन यादव मजदूरी करने कोलकाता चले गए, जबकि राकेश यादव ननिहाल में रहकर पशुपालन और अन्य कार्य करते रहे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद दोनों ने हार नहीं मानी। करीब पांच वर्षों तक विभिन्न स्थानों पर काम कर उन्होंने प्रसाधन का हुनर सीखा और वर्ष 2013 में धनबाद से स्वरोजगार की शुरुआत की। आज उनका व्यवसाय बिहार और झारखंड के कई शहरों तक फैल चुका है।
हजारों युवाओं को मिला रोजगार
उनके नेटवर्क से 2000 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है, जबकि 1000 से ज्यादा युवाओं को प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाया गया है। आधुनिक सुविधाओं से लैस उनकी शाखाएं लगातार विस्तार कर रही हैं।

युवाओं के लिए बने प्रेरणा
मोहन और राकेश यादव आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनका मानना है कि सही दिशा, कौशल और मेहनत के बल पर कोई भी व्यक्ति अपनी परिस्थितियों को बदल सकता है। यही सोच उन्हें रोजगार सृजन और युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार काम करने के लिए प्रेरित करती है।
