पश्चिम बंगाल की राजनीति में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था में किए गए अचानक बदलाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस ने इस बदलाव पर गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि मुख्यमंत्री की सुरक्षा में वर्षों से तैनात भरोसेमंद सुरक्षाकर्मियों को बिना किसी पूर्व सूचना के हटाकर नए कर्मियों की नियुक्ति कर दी गई है।
- राज्यसभा में टीएमसी के वरिष्ठ नेता और सांसद डैरेक ओ’ब्रायन ने दावा किया कि बुधवार को धर्मतला से सुभाष मल्लिक स्क्वायर तक आयोजित एक मार्च के दौरान शाम करीब 7:30 बजे यह बदलाव किया गया। ममता बनर्जी की सुरक्षा में तैनात पुराने पुलिसकर्मियों को हटाकर नए चेहरों को ड्यूटी पर लगा दिया गया।
- डैरेक ओ’ब्रायन के अनुसार, हटाए गए कई सुरक्षाकर्मी पिछले करीब 20 वर्षों से ममता बनर्जी की सुरक्षा कोर-टीम का हिस्सा थे और उनके साथ साए की तरह रहते थे।
कालीघाट आवास के बाहर लगाए गए अवरोधक
इस सुरक्षा बदलाव के बीच, दक्षिण कोलकाता के कालीघाट स्थित ममता बनर्जी के आवास के बाहर सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अस्थायी दृश्य अवरोधक भी लगाए गए हैं।
सांसद कल्याण बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि सुरक्षा जैसे संवेदनशील मामले में इस तरह का अचानक और गुपचुप बदलाव कई तरह के संदेह पैदा करता है, इसलिए प्रशासन को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
क्या कहता है नियम?
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री के आवास और उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा की जिम्मेदारी ‘सुरक्षा निदेशालय’ के अधीन होती है। नियमों के अनुसार, समय-समय पर सुरक्षा समीक्षा और इनपुट के आधार पर सुरक्षाकर्मियों और व्यवस्थाओं में रूटीन बदलाव किए जाते हैं।
हालांकि, इस पूरे मामले पर अभी तक राज्य सरकार या पुलिस प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की गई है। फिलहाल यह मुद्दा बंगाल के राजनीतिक हलकों में बेहद गरमा गया है और हर किसी को प्रशासन की प्रतिक्रिया का इंतजार है।
