महाराष्ट्र में सियासी हलचल: उद्धव गुट के 6 सांसदों की सुरक्षा बढ़ी, दिल्ली की ‘आपात बैठक’ से बगावत की अटकलें तेज

"सुरक्षा का पहरा या बगावत का खतरा? उद्धव गुट की 'आपात बैठक' से महाराष्ट्र में फिर सियासी भूचाल!"

Johar News Times
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महाराष्ट्र की सियासत में एक बार फिर बड़े फेरबदल के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना के भीतर संभावित असंतोष और बगावत की खबरों के बीच, पार्टी के छह सांसदों की सुरक्षा में अचानक बड़ा इजाफा किया गया है। गृह मंत्रालय के निर्देश पर इन सांसदों को Y+ श्रेणी के बराबर स्थानीय सुरक्षा मुहैया कराई गई है।

खुफिया रिपोर्ट के बाद लिया गया फैसला

17 जून 2026 को जारी एक आधिकारिक वायरलेस संदेश के अनुसार, गृह मंत्रालय ने संभावित सुरक्षा जोखिमों को देखते हुए यह कदम उठाया है। महाराष्ट्र पुलिस और खुफिया इकाइयों को निर्देश दिए गए हैं कि:

  • संबंधित छह सांसदों को तुरंत अतिरिक्त सुरक्षा कवर दिया जाए।
  • समय-समय पर उनके सुरक्षा जोखिमों की समीक्षा की जाए।

दिल्ली की ‘आपात बैठक’ में सांसदों की गैरमौजूदगी ने बढ़ाई धड़कनें

सुरक्षा बढ़ाए जाने के साथ ही दिल्ली में आयोजित शिवसेना की एक आपातकालीन बैठक ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है।

  • पार्टी नेतृत्व ने सभी सांसदों को दिल्ली की इस बैठक में अनिवार्य रूप से शामिल होने का निर्देश दिया था।
  • इस कड़े निर्देश के बावजूद बैठक में महज कुछ ही सांसद पहुंचे, जिनमें मुख्य रूप से संजय राउत शामिल थे।
  • अधिकांश सांसदों की इस अनुपस्थिति को पार्टी के भीतर चल रहे गहरे असंतोष और संभावित राजनीतिक पाला बदलने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

सड़कों पर उतरे उद्धव समर्थक, बगावत की खबरों से नाराजगी

सांसदों के टूटने और संभावित बगावत की खबरों ने शिवसेना के कार्यकर्ताओं को आक्रोशित कर दिया है।

सड़कों पर प्रदर्शन: उद्धव ठाकरे के प्रति वफादार कार्यकर्ता संभावित बगावत की खबरों से नाराज होकर सड़कों पर उतर आए हैं और विभिन्न स्थानों पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

राजनीतिक सूत्रों के हवाले से खबर है कि कुछ सांसद जल्द ही कोई अलग राजनीतिक रुख अपना सकते हैं, हालांकि अभी तक किसी भी पक्ष की ओर से इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

विश्लेषकों की राय: जल्दबाजी होगी, लेकिन हलचल तय है

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल एक बैठक में अनुपस्थिति के आधार पर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। कई बार सांसदों के न आने के व्यक्तिगत या अन्य कारण भी हो सकते हैं। हालांकि, जिस तरह से अचानक सुरक्षा बढ़ाई गई है और सांसद दिल्ली नहीं पहुंचे, उसने शिवसेना के भीतर मची खींचतान को जगजाहिर जरूर कर दिया है। अब देखना यह होगा कि उद्धव ठाकरे इस संभावित संकट से निपटने के लिए क्या कदम उठाते हैं।

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