सरायकेला में जंगली हाथियों का तांडव, ईचागढ़ में बुजुर्ग को कुचला, रुचाप में घर तोड़कर चट कर गए 6 क्विंटल धान

"सरायकेला में गजराज का कोप: ईचागढ़ में बुजुर्ग की गई जान, रुचाप में उजड़ा आशियाना; अवैध खनन ने बदला हाथियों का रास्ता!"

Johar News Times
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सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र में जंगली हाथियों का आतंक चरम पर पहुंच गया है। बीती रात हाथियों के झुंड ने क्षेत्र में भारी तबाही मचाई। ईचागढ़ प्रखंड के बोनडीह गांव में जहां एक हाथी ने 60 वर्षीय बुजुर्ग को पटककर मार डाला, वहीं रुचाप पंचायत के सालडीह टोला में एक गरीब ग्रामीण का आशियाना उजाड़ कर घर में रखा क्विंटल भर अनाज खा गए। इन बैक-टू-बैक घटनाओं से पूरे इलाके में दहशत और वन विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश है।

ईचागढ़ में हाथी के हमले से बुजुर्ग चंपा सिंह मुंडा की मौत

पहली दर्दनाक घटना ईचागढ़ प्रखंड के लावा-कुटाम पंचायत अंतर्गत बोनडीह गांव की है। यहाँ बीती रात जंगली हाथी ने अचानक हमला कर 60 वर्षीय बुजुर्ग चंपा सिंह मुंडा को मौत के घाट उतार दिया। इस घटना के बाद से मृतक के परिवार में कोहराम मचा हुआ है और पूरे गांव में मातम के साथ-साथ भारी भय का माहौल है। ग्रामीण अब शाम ढलते ही घरों से बाहर निकलने में कतरा रहे हैं।

दूसरी घटना रुचाप टोला सालडीह की है, जहां राजू हेंब्रम के घर को हाथियों के झुंड ने निशाना बनाया। हाथियों ने राजू के घर की दीवारों को क्षतिग्रस्त कर दिया और अंदर बोरे में रखा लगभग 6 क्विंटल धान खा गए। घटना के वक्त राजू की पत्नी और बच्चे घर के भीतर ही थे, जिन्होंने किसी तरह दीवार से सटकर और खुद को छिपाकर अपनी जान बचाई।

वन विभाग पर लापरवाही का आरोप, रातभर जाग रहे ग्रामीण

बढ़ते आतंक को लेकर स्थानीय समाजसेवी राजू किस्कू ने वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि दलमा और आसपास के जंगलों से सटे गांवों में हाथियों का उत्पात जारी है, लेकिन वन विभाग कुंभकर्णी नींद सोया है। ग्रामीण पूरी रात जागकर हाथियों को खदेड़ने और अपने बच्चों की रक्षा करने को मजबूर हैं। प्रभावित क्षेत्रों में न तो हाथियों के मूवमेंट की ट्रैकिंग की जा रही है और न ही पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिल पा रहा है।

राकेश रंजन विस्थापित अधिकार मंच फाउंडेशन के अध्यक्ष राकेश रंजन महतो ने इस संघर्ष के पीछे की मुख्य वजह पर्यावरणीय असंतुलन को बताया है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में धड़ल्ले से हो रहे अवैध पत्थर खनन और बालू के अवैध उठाव के कारण हाथियों के पारंपरिक ‘एलीफेंट कॉरिडोर’ पूरी तरह बाधित हो गए हैं। जंगलों में इंसानी दखल के कारण ही हाथी भटककर आबादी वाले इलाकों में घुस रहे हैं।

प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की मांग

सामाजिक संगठनों और ग्रामीणों ने जिला प्रशासन व वन विभाग से मांग की है कि प्रभावित गांवों में तुरंत क्विक रिस्पांस टीम तैनात की जाए, ग्रामीणों को हाथियों के आने की एडवांस सूचना देने का तंत्र विकसित हो और मृतक के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो वे आंदोलन को बाध्य होंगे।

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