रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने बहुचर्चित 730 करोड़ रुपये के जीएसटी घोटाले मामले में शहर के कारोबारी विक्की भालोटिया उर्फ अमित अग्रवाल की जमानत याचिका सोमवार को खारिज कर दी। जुगसलाई निवासी अमित अग्रवाल इस मामले के प्रमुख आरोपियों में शामिल हैं।
अदालत ने बचाव पक्ष और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया। आरोपी ने 6 मई को जमानत याचिका दाखिल की थी, लेकिन अदालत ने वित्तीय घोटाले की गंभीरता को देखते हुए राहत देने से इनकार कर दिया।
90 से अधिक शेल कंपनियों के जरिए फर्जीवाड़ा
ईडी की जांच के अनुसार यह पूरा मामला फर्जी शेल कंपनियों के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के अवैध लाभ से जुड़ा है। जांच एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने 90 से अधिक फर्जी कंपनियों का नेटवर्क तैयार कर करीब 14,325 करोड़ रुपये के फर्जी बिल और इनवॉइस बनाए। इन्हीं फर्जी लेनदेन के आधार पर 730 करोड़ रुपये से अधिक का अवैध और फर्जी आईटीसी क्लेम किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान पहुंचा।
डीजीजीआई की कार्रवाई के बाद शुरू हुई ईडी जांच
मामले की शुरुआत डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ जीएसटी इंटेलिजेंस (डीजीजीआई) की कार्रवाई के बाद हुई थी। जीएसटी अधिकारी दिनेश सिंह के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई, जिसके बाद ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की।
कई कारोबारी पहले से जेल मे
इस मामले में ईडी पहले ही शिव कुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा, सुमित गुप्ता और कोलकाता के कारोबारी अमित गुप्ता समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। जांच एजेंसियों के मुताबिक इस पूरे नेटवर्क का बड़ा हिस्सा सीधे जमशेदपुर से संचालित हो रहा था।
जांच एजेंसियां और तेज करेंगी कार्रवाई
पीएमएलए कोर्ट द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब ईडी इस मामले में कानूनी कार्रवाई और तेज कर सकती है। जांच एजेंसी शेल कंपनियों के पूरे नेटवर्क, बैंक ट्रांजैक्शन और कथित मनी ट्रेल की गहन जांच कर रही है।
