आज बॉलीवुड के सबसे स्टाइलिश, कॉन्फिडेंट और दिग्गज फिल्ममेकर्स में शुमार करण जौहर अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। आज भले ही करण की एक आवाज पर पूरी फिल्म इंडस्ट्री खड़ी हो जाती है, लेकिन उनकी जिंदगी का एक ऐसा पहलू भी है जो बेहद दर्दनाक रहा। बचपन में अपनी चाल-ढाल, मोटापे और बोलने के तरीके के कारण लगातार मजाक का पात्र बनने वाले करण ने जिस तरह खुद को बदला और कामयाबी के शिखर पर पहुंचे, वह किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है।
आइए उनके जन्मदिन के इस खास मौके पर जानते हैं उनकी जिंदगी और संघर्षों से जुड़े कुछ अनसुने किस्से:
1. चाल-ढाल और मोटापे के कारण उड़ता था मजाक
आज करण जौहर भले ही कैमरे के सामने बेहद बेबाकी से बात करते हों, लेकिन बचपन में वह बेहद डरे हुए और इंट्रोवर्ट (शर्मीले) बच्चे थे। एक इंटरव्यू में करण ने बताया था:
- बचपन में वह काफी ओवरवेट (ज्यादा वजन वाले) थे और थोड़े एफेमिनेट (लड़कियों जैसे हाव-भाव वाले) थे।
- 80 के दशक में जब भी वह क्रिकेट, फुटबॉल या बास्केटबॉल खेलने जाते, तो लोग उनकी बॉडी लैंग्वेज और दौड़ने के तरीके का मजाक उड़ाते थे।
- उस दौर में लोग उनके लिए ‘पैंसी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे, जिसने उन्हें पूरी तरह से डरा दिया था और वह लोगों के बीच जाने से कतराने लगे थे।
2. आवाज बदलने के लिए ली 3 साल ट्रेनिंग, पेरेंट्स से बोला झूठ
कॉलेज के दिनों में करण को एहसास हुआ कि वह पब्लिक स्पीकिंग में अच्छे हैं, लेकिन जब वह एक अकादमी में गए तो वहां के हेड ने उनसे कहा कि उनकी आवाज काफी ‘गर्लिश’ है और दुनिया उनके साथ सख्त रवैया अपनाएगी। उन्होंने करण को आवाज में भारीपन (बैरीटोन) लाने की सलाह दी।
- करण ने करीब 3 साल तक वॉइस ट्रेनिंग ली ताकि उनकी आवाज ज्यादा मर्दाना लग सके।
- झिझक के कारण उन्होंने अपने माता-पिता से यह बात छिपाई और झूठ बोला कि वह कंप्यूटर क्लास जा रहे हैं।
- मजेदार किस्सा यह है कि 3 साल बाद जब उनके पिता के ऑफिस में कंप्यूटर आया और उन्होंने करण से उसे चलाने को कहा, तो करण को समझ ही नहीं आया कि क्या करें, क्योंकि उन्होंने जिंदगी में कभी कंप्यूटर क्लास अटेंड ही नहीं की थी।
3. माता-पिता थे फिल्मों के खिलाफ, मां ने एक महीने नहीं की बात
करण जौहर के पिता यश जौहर खुद फिल्ममेकर थे, लेकिन फिल्मों में लगातार हो रहे नुकसान के कारण वह नहीं चाहते थे कि उनका बेटा इस अनिश्चितता भरी इंडस्ट्री में आए।
- परिवार चाहता था कि करण फ्रांस जाकर फ्रेंच भाषा सीखें और उनका एक्सपोर्ट-इंपोर्ट का बिजनेस संभालें।
- जब करण ने आदित्य चोपड़ा के साथ फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ (DDLJ) में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर काम करने का फैसला किया, तो उनकी मां हीरू जौहर इतनी नाराज हुईं कि उन्होंने एक महीने तक करण से बात नहीं की थी।
4. शाहरुख खान के एक भरोसे ने बदल दी जिंदगी
DDLJ की शूटिंग के दौरान ही शाहरुख खान ने करण के भीतर के डायरेक्टर को पहचान लिया था। शाहरुख ने उनसे कहा था, “तुम्हें फिल्म डायरेक्ट करनी चाहिए, मैं तुम्हारी फिल्म में एक्टिंग करूंगा।” पास खड़ी काजोल ने भी इसमें हामी भरी।
- जब करण ने यह बात अपने माता-पिता को बताई तो उन्हें यकीन नहीं हुआ। उनके पिता ने तो यहां तक कह दिया था कि “ये लोग पागल हो गए हैं, तुम्हें डायरेक्शन के बारे में क्या पता है?”
- लेकिन शाहरुख खान अपने वादे के पक्के निकले। उन्होंने यश जौहर को फोन किया और 1997 में करण को अपनी डेट्स दे दीं। इसके बाद 1998 में आई ‘कुछ कुछ होता है’, जिसने बॉक्स ऑफिस के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए और करण जौहर रातों-रात स्टार डायरेक्टर बन गए।
संघर्ष और आलोचनाओं के बीच बनाई अलग पहचान
करण जौहर ने इसके बाद ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘कल हो ना हो’ (बतौर प्रोड्यूसर-राइटर) और ‘ऐ दिल है मुश्किल’ जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। हाल के सालों में वह नेपोटिज्म (भाई-भतीजावाद) को लेकर काफी ट्रोल भी हुए, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। आज वह न सिर्फ एक बेहतरीन डायरेक्टर और प्रोड्यूसर हैं, बल्कि ‘धर्मा प्रोडक्शंस’ के जरिए नए टैलेंट को लॉन्च करने वाले बॉलीवुड के सबसे बड़े किंगमेकर भी हैं।
