पूर्वी सिंहभूम जिले के गुड़ाबांदा प्रखंड अंतर्गत कोइमा गांव के तलपाथर पाड़ा में सोमवार को पेसा अधिनियम 1996 और आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण ग्रामसभा आयोजित की गई। ग्रामसभा में आदिवासी भूमिज समाज के ग्रामीणों, पारंपरिक पदाधिकारियों, बुद्धिजीवियों और समाज के गणमान्य लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।
सभा के दौरान आदिवासी समाज की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था, रीति-रिवाज, संस्कृति, जल-जंगल-जमीन और सामुदायिक अधिकारों की रक्षा एवं संरक्षण को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। ग्रामीणों ने कहा कि पेसा अधिनियम 1996 आदिवासी ग्रामसभाओं को पारंपरिक अधिकारों और स्वशासन व्यवस्था संचालित करने का संवैधानिक अधिकार प्रदान करता है, इसलिए इसे गांव स्तर पर प्रभावी रूप से लागू किया जाना जरूरी है।
ग्रामसभा में सर्वसम्मति से गांव की पारंपरिक प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए विभिन्न पारंपरिक पदाधिकारियों का चयन भी किया गया। इसके तहत माधव चन्द्र सिंह को हातु सरदार (ग्राम प्रधान), योगेन्द्र सिंह को नाया, पीतांबर सिंह को देउरी और मन सिंह को डाकुआ चुना गया। सभा में यह निर्णय लिया गया कि सभी पारंपरिक पदाधिकारी पेसा अधिनियम और आदिवासी परंपराओं के अनुरूप गांव की सामाजिक न्याय व्यवस्था, धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपराओं, सामुदायिक अधिकारों और ग्रामहित से जुड़े विषयों का संचालन करेंगे।
ग्रामीणों ने सामाजिक एकता, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, ग्राम विकास, आदिवासी अस्मिता और पारंपरिक अधिकारों की रक्षा के लिए ग्रामसभा को सर्वोच्च निर्णयकारी संस्था के रूप में मजबूत करने पर सहमति जताई। अंत में ग्रामसभा में पारित प्रस्ताव को सभी सदस्यों ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष उपस्थित रहे।
