20-30 की उम्र में युवाओं को क्यों जकड़ रहा है हाई बीपी? जानें ऑफिस स्ट्रेस का दिल पर खतरनाक असर

बाहर से पूरी तरह फिट दिखने वाले युवा भी अंदर ही अंदर लगातार तनाव का शिकार हो रहे हैं,

Johar News Times
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव (Stress) को लोगों ने अपनी रूटीन का हिस्सा मान लिया है। जो हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) कभी बढ़ती उम्र की बीमारी माना जाता था, वह अब 20 से 30 साल के युवाओं, ऑफिस कर्मचारियों और छात्रों को अपनी चपेट में ले रहा है। बाहर से पूरी तरह फिट दिखने वाले युवा भी अंदर ही अंदर लगातार तनाव का शिकार हो रहे हैं, जिसका सीधा असर उनके दिल (Heart Health) पर पड़ रहा है।

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के अनुसार, हाई ब्लड प्रेशर अक्सर बिना किसी लक्षण के धीरे-धीरे शरीर को खोखला करता है। वहीं, यूएस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (NIH) का कहना है कि तनाव के समय शरीर ‘फाइट या फ्लाइट’ (Fight or Flight) मोड में चला जाता है, जिससे हार्ट रेट और बीपी अचानक बढ़ जाते हैं।


तनाव के दौरान शरीर में क्या होता है?

मार्गा माइंड केयर के कंसल्टेंट एडल्ट साइकाइट्रिस्ट डॉ. मौर्यदीप घटक बताते हैं:

जब इंसान मानसिक तनाव में होता है, तो शरीर कोर्टिसोल (Cortisol) हार्मोन रिलीज करता है। इससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाएं) सिकुड़ने लगती हैं, जिसके चलते ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है।

डॉ. घटक के मुताबिक, हमारा शरीर मानसिक और शारीरिक तनाव में फर्क नहीं कर पाता। आप भले ही ऑफिस की आरामदायक कुर्सी पर बैठे हों, लेकिन मानसिक तनाव के कारण शरीर उसी तरह रिएक्ट करता है जैसे वह किसी बड़े खतरे से भाग रहा हो।


लगातार मेंटल स्ट्रेस: दिमाग हमेशा ‘अलर्ट मोड’ पर

समस्या तब और गंभीर हो जाती है जब तनाव कुछ घंटों का नहीं, बल्कि लगातार कई दिनों या महीनों का हो जाता है।

  • देर रात तक काम का प्रेशर
  • हर वक्त मोबाइल के नोटिफिकेशन्स
  • ट्रैफिक और आर्थिक दबाव
  • पर्सनल लाइफ की परेशानियां

ये तमाम वजहें दिमाग को हमेशा ‘अलर्ट मोड’ पर रखती हैं। NIH के एक रिसर्च रिव्यू के मुताबिक, लंबे समय तक रहने वाला यह मानसिक तनाव धीरे-धीरे व्यक्ति को स्थायी (Permanent) हाई ब्लड प्रेशर का मरीज बना देता है।


नींद और लाइफस्टाइल पर पड़ता है सीधा डाका

डॉ. मौर्यदीप घटक के अनुसार, तनाव का सबसे घातक असर हमारी नींद और आदतों पर पड़ता है:

  • खराब नींद: सोते समय हमारा ब्लड प्रेशर सामान्य रूप से कम होता है, जिससे दिल को आराम मिलता है और ब्लड वेसल्स रिकवर होती हैं। लेकिन देर रात तक मोबाइल-लैपटॉप के इस्तेमाल से मेलाटोनिन (Melatonin) हार्मोन कम बनता है, जिससे नींद का साइकिल बिगड़ जाता है।
  • बिगड़ती आदतें: स्ट्रेस के कारण लोग वर्कआउट छोड़ देते हैं, जंक फूड का सेवन बढ़ा देते हैं और स्मोकिंग व अल्कोहल (धूम्रपान और शराब) जैसी खतरनाक आदतों की ओर रुख करते हैं। ये सभी चीजें मिलकर हार्ट अटैक और स्ट्रेस के खतरे को दोगुना कर देती हैं।

बचाव के लिए डॉक्टर्स की सलाह

अब चिकित्सा विशेषज्ञ तनाव को सिर्फ एक मानसिक समस्या नहीं, बल्कि हार्ट हेल्थ के लिए सबसे बड़ा खतरा मान रहे हैं। इससे बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है:

  • स्क्रीन टाइम घटाएं: सोने से कम से कम 1 घंटे पहले मोबाइल और लैपटॉप से दूरी बनाएं।
  • वर्क-लाइफ बैलेंस: काम और निजी जिंदगी के बीच संतुलन बनाना सीखें।
  • रेगुलर एक्सरसाइज: रोजाना कम से कम 30 मिनट वॉक, योग या एक्सरसाइज करें।
  • हेल्दी डाइट: पैकेज्ड और जंक फूड से तौबा करें, पर्याप्त नींद लें।

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