देश के कई हिस्सों में इस वक्त भीषण गर्मी का दौर जारी है। कई शहरों में तापमान 45 से 46 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। गर्म हवाओं और लू के थपेड़ों के बीच हेल्थ एक्सपर्ट्स ने एक बड़ा अलर्ट जारी किया है। डॉक्टरों के अनुसार, यह मौसम सामान्य लोगों के लिए तो चुनौतीपूर्ण है ही, लेकिन कुछ गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों के लिए यह बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।
जरा सी लापरवाही मरीजों की हालत बिगाड़ सकती है और अस्पताल जाने की नौबत आ सकती है। आइए जानते हैं कि इस मौसम में किन मरीजों को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है।
इन बीमारियों के मरीजों पर मंडरा रहा है सबसे बड़ा खतरा
1. हार्ट और हाई ब्लड प्रेशर के मरीज
तेज गर्मी में शरीर के तापमान को नियंत्रित रखने के लिए दिल को दोगुनी मेहनत करनी पड़ती है। शरीर को ठंडा रखने की प्रक्रिया में हार्ट रेट बढ़ जाता है और पानी की कमी होने लगती है। जो लोग पहले से हार्ट डिजीज या हार्ट फेलियर से जूझ रहे हैं, उनमें हीट स्ट्रेस की वजह से सीने में दर्द, सांस फूलना और कमजोरी जैसी दिक्कतें बढ़ सकती हैं। गंभीर मामलों में हार्ट अटैक का खतरा भी रहता है।
इसके अलावा, हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों का ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होने से बीपी में उतार-चढ़ाव आ सकता है। बीपी की कुछ दवाइयां शरीर में पानी की कमी को और बढ़ा देती हैं, जिससे चक्कर या बेचैनी महसूस हो सकती है।
2. अस्थमा और सांस के मरीज
गर्मी के मौसम में अस्थमा और सांस के मरीजों को भी ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए। गर्म और शुष्क हवा सांस की नलियों को प्रभावित करती है। इसके साथ ही हवा में मौजूद धूल और प्रदूषण के कण अस्थमा और सीओपीडी (COPD) के मरीजों की परेशानी बढ़ा देते हैं। इस मौसम में सांस लेने में दिक्कत, लगातार खांसी और सीने में जकड़न की समस्या बढ़ जाती है।
3. डायबिटीज के मरीज
शुगर के मरीजों को गर्मी के मौसम में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) बहुत जल्दी होता है। शरीर में पानी कम होने से ब्लड शुगर लेवल सीधे तौर पर प्रभावित होता है, जिससे अचानक कमजोरी या चक्कर आने की समस्या हो सकती है। कुछ मामलों में अत्यधिक गर्मी इंसुलिन और अन्य दवाओं के असर को भी कम कर सकती है।
4. किडनी के मरीज
तेज गर्मी के कारण शरीर से ज्यादा पसीना निकलता है। अगर ऐसी स्थिति में पर्याप्त पानी न पिया जाए, तो किडनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। किडनी की बीमारियों से जूझ रहे लोगों में डिहाइड्रेशन के कारण स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे मरीजों के लिए शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी होता है।
बचाव के लिए जरूरी सलाह
- हाइड्रेटेड रहें: प्यास न लगी हो तब भी थोड़ी-थोड़ी देर में पानी, नींबू पानी या ओआरएस (ORS) का घोल पीते रहें।
- समय पर मॉनिटरिंग: डायबिटीज और बीपी के मरीज समय-समय पर अपना शुगर लेवल और ब्लड प्रेशर चेक करते रहें।
- दवाइयां साथ रखें: अस्थमा के मरीज घर से बाहर निकलते समय अपना इन्हेलर और जरूरी दवाइयां हमेशा अपने साथ रखें।
- धूप से बचें: दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच, जब धूप सबसे तेज होती है, बिना वजह बाहर निकलने से बचें। बाहर जाते समय सिर को सूती कपड़े या छतरी से ढकें।
