सोनादेवी विश्वविद्यालय में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह बोले— “उन्हें सम्मान देने वाला स्वयं सम्मानित हो जाता है”

सोनादेवी विश्वविद्यालय में रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती, कुलाधिपति प्रभाकर सिंह बोले— “उन्हें सम्मान देने वाला स्वयं सम्मानित हो जाता है”

Johar News Times
2 Min Read

घाटशिला स्थित सोनादेवी विश्वविद्यालय में कविगुरु रवीन्द्रनाथ टैगोर की 165वीं जयंती के अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुई। इस अवसर पर कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर ऐसी महान शख्सियत थे कि “उन्हें सम्मानित करने वाला स्वयं सम्मानित हो जाता है।” उन्होंने कहा कि टैगोर ने पुनर्जागरण के लिए कार्य किया, रचनात्मकता को बढ़ावा दिया और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रमुखता दी, जिससे सांस्कृतिक चेतना का व्यापक संचार हुआ।

- Advertisement -
Ad image

विश्वविद्यालय की कुलसचिव डॉ. नित नयना ने कहा कि गुरुदेव ने रचनात्मक प्रतिभा को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर शिक्षा के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों और शिक्षकों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बी. फार्मा की छात्रा बालेश्वरी मार्डी और लक्ष्मी मुर्मू ने नृत्य प्रस्तुत कर गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। अंग्रेजी विभाग की सहायक प्राध्यापक अनुसूआ रॉय ने भावपूर्ण नृत्य प्रस्तुति दी, जबकि गणित विभाग के सहायक प्राध्यापक कृष्णेंदु दत्ता ने गीत प्रस्तुत किया और कहा कि “जहां मन की स्वतंत्रता है, गुरुदेव वहां आज भी जीवित हैं।”

मनोविज्ञान विभाग की सहायक प्राध्यापक डॉ. निभा शुक्ला ने उनके जीवन संदेशों पर प्रकाश डाला। बी. फार्मा के छात्र संदीप सिंह देव और वित्त विभाग की कर्मचारी प्रियंका ने भी टैगोर की शिक्षाओं को याद किया।

कार्यक्रम का संचालन बांग्ला विभाग की अध्यक्ष डॉ. प्रियंजना बनर्जी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन इतिहास विभाग की अध्यक्ष डॉ. कंचन सिन्हा ने किया। समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ।

- Advertisement -
Ad image
Share This Article