आज के दौर में बच्चों को चुप कराने या खाना खिलाने के लिए उनके हाथ में मोबाइल थमाना एक आम बात हो गई है, लेकिन आपकी यह सुविधा बच्चे के भविष्य के लिए घातक साबित हो सकती है। हाल ही में हुई एक रिसर्च में मोबाइल और स्क्रीन टाइम को लेकर बेहद डरावने तथ्य सामने आए हैं। अध्ययन के अनुसार, जो बच्चे बहुत कम उम्र से मोबाइल या टीवी स्क्रीन के संपर्क में आ रहे हैं, उनमें सीखने की क्षमता तेजी से घट रही है। रिसर्च में यह पाया गया है कि एक साल की उम्र में ज्यादा स्क्रीन देखने वाले बच्चों में तीन साल की उम्र तक ऑटिज्म जैसे गंभीर मानसिक विकार के लक्षण देखे जा रहे हैं, जिसका असर लड़कियों के मुकाबले लड़कों में अधिक पाया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शुरुआती सालों में बच्चों का दिमाग तेजी से विकसित होता है और इस दौरान उन्हें माता-पिता से बातचीत करने व उनके चेहरे के हावभाव समझने की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। जब बच्चा लगातार मोबाइल स्क्रीन में उलझा रहता है, तो उसका सामाजिक और मानसिक विकास पूरी तरह रुक जाता है। वास्तव में बच्चा माता-पिता की आवाज और उनके व्यवहार को देखकर जितना सीखता है, उतना किसी डिजिटल गैजेट से नहीं सीख सकता। ऑटिज्म एक ऐसी स्थिति है जिसमें बच्चा सामान्य रूप से सामाजिक व्यवहार और भाषा को नहीं समझ पाता है।
यदि आपका बच्चा नाम पुकारने पर कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, आंखों में आंखें डालकर बात करने से कतराता है, उसके बोलने में देरी हो रही है या वह दूसरे बच्चों के साथ खेलने के बजाय अपनी ही दुनिया में खोया रहता है, तो इन संकेतों को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें। विशेषज्ञों की सलाह है कि 18 महीने से कम उम्र के बच्चों को स्क्रीन से पूरी तरह दूर रखना चाहिए। यदि बच्चे को मोबाइल की लत लग चुकी है, तो उसे धीरे-धीरे कम करें क्योंकि अचानक मोबाइल छीनने से बच्चा चिड़चिड़ा हो सकता है। बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए मोबाइल के बजाय उन्हें परिवार का साथ और वास्तविक दुनिया का अनुभव देना सबसे जरूरी है।









