योजनाओं का क्रियान्वयन प्रभावित, छोटे कामों के लिए भटक रहे ग्रामीण
पूर्वी सिंहभूम के गुड़ाबांदा प्रखंड में कर्मचारियों की भारी कमी के कारण प्रशासनिक व्यवस्था चरमरा गई है। हालात ऐसे हैं कि पूरे प्रखंड की आठ पंचायतों का संचालन केवल तीन पंचायत सचिवों के भरोसे चल रहा है। इससे पंचायत कार्यालयों का नियमित कामकाज और सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रखंड कार्यालय “राम भरोसे” चल रहा है और लोगों को छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार भालकी और फॉरेस्ट ब्लॉक पंचायत की जिम्मेदारी पंचायत सचिव धनाई मुर्मू के पास है। वहीं सिंहपुरा, बालीजुड़ी और मुड़ाकाटी पंचायत का कार्य कृष्ण चंद्र मंडल देख रहे हैं। दूसरी ओर कमल किशोर मंडल के जिम्मे गुड़ाबांदा, अंगारपाड़ा और बनमाकड़ी पंचायत हैं। पंचायत सचिवों की कमी के कारण ग्रामीणों को यह तक पता नहीं चल पाता कि किस दिन पंचायत कार्यालय खुलेगा और कर्मचारी कब उपलब्ध रहेंगे। इसका सीधा असर जाति प्रमाणपत्र, आवास योजना, पेंशन, मनरेगा और अन्य सरकारी योजनाओं पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जरूरी दस्तावेज और योजनाओं से जुड़े काम समय पर नहीं हो पा रहे हैं, जिससे लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है।
स्थिति और गंभीर इसलिए भी हो गई है क्योंकि एकमात्र महिला पंचायत सचिव ग्लोरिया पूर्ति मेडिकल लीव पर हैं। वहीं मनोज कुमार साहू का मूल वेतन गुड़ाबांदा प्रखंड से निकलने के बावजूद उनके रांची में पदस्थ रहने की चर्चा है। इससे स्थानीय स्तर पर कामकाज का अतिरिक्त दबाव अन्य कर्मचारियों पर आ गया है।
जनसेवकों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं बताई जा रही है। प्रखंड में केवल तीन जनसेवक कार्यरत हैं। इनमें ललित शर्मा एजीएम के प्रभार में हैं, जबकि कृष्णा सिंह खूंटिया प्रखंड कृषि पदाधिकारी के रूप में कार्य कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कृषि विभाग की योजनाएं बिचौलियों के भरोसे संचालित हो रही हैं और जमीनी स्तर पर निगरानी का अभाव है। दीपक कुमार बेरा को लेकर भी ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं और आरोप लगाया है कि उन्हें मिले प्रभारों में अपेक्षित कार्य नहीं हो पाए हैं। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से गुहार लगाई है कि गुड़ाबांदा प्रखंड में जल्द पर्याप्त संख्या में पंचायत सचिवों और जनसेवकों की नियुक्ति की जाए, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था पटरी पर लौट सके और लोगों को योजनाओं का लाभ समय पर मिल सके।
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