समय से पहले मानसून की दस्तक के संकेत, लेकिन ‘सुपर अल नीनो’ ने बढ़ाई चिंता

समय से पहले मानसून की दस्तक के संकेत, लेकिन ‘सुपर अल नीनो’ ने बढ़ाई चिंता

Johar News Times
3 Min Read

नई दिल्ली : देशभर में भीषण गर्मी के बीच राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने संभावना जताई है कि दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार तय समय से पहले 26 मई को केरल पहुंच सकता है। आमतौर पर केरल में मानसून 1 जून को दस्तक देता है, लेकिन इस बार अनुकूल मौसमी परिस्थितियों के कारण इसके जल्दी आने के संकेत मिले हैं। हालांकि आईएमडी ने स्पष्ट किया है कि मानसून की वास्तविक एंट्री 26 मई से चार दिन पहले या बाद भी हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार अरब सागर में मानसून के आगे बढ़ने के लिए सकारात्मक परिस्थितियां बन रही हैं। अगले 24 घंटों में मानसून के बंगाल की खाड़ी, अंडमान सागर और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह की ओर तेजी से बढ़ने की संभावना है। भारत में जून से सितंबर के बीच सक्रिय रहने वाला मानसून देश की लगभग 70 प्रतिशत वार्षिक वर्षा का प्रमुख स्रोत होता है। इधर, अमेरिका की मौसम एजेंसी ‘नेशनल ओशेनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन’ (NOAA) ने इस साल ‘सुपर अल नीनो’ की आशंका जताई है। एजेंसी के क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर (CPC) के मुताबिक मई से जुलाई 2026 के बीच अल नीनो विकसित होने की 82 प्रतिशत संभावना है। वहीं दिसंबर 2026 से फरवरी 2027 तक इसके बने रहने की आशंका 96 प्रतिशत तक बताई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुपर अल नीनो की स्थिति बनी तो भारत में मानसून कमजोर पड़ सकता है और कई हिस्सों में सूखा व हीटवेव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

क्या है अल नीनो और इसका असर?

अल नीनो प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की जलवायु घटना है। इसके कारण मानसूनी हवाओं की दिशा और गति प्रभावित होती है। भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया में सामान्य से कम बारिश और अधिक गर्मी देखने को मिलती है। वहीं इंडोनेशिया और उत्तरी ऑस्ट्रेलिया में सूखे और जंगलों में आग का खतरा बढ़ जाता है। दूसरी ओर मध्य प्रशांत क्षेत्र में भारी बारिश और चक्रवात जैसी स्थितियां बन सकती हैं।

ज्यादा बारिश के बावजूद बढ़ रहा सूखा

इसी बीच ‘नेचर’ जर्नल में प्रकाशित एक नई स्टडी में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शोध के मुताबिक दुनिया में कुल बारिश की मात्रा बढ़ रही है, लेकिन इसके बावजूद जमीन और इकोसिस्टम ज्यादा सूखे होते जा रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार अब बारिश लंबे समय तक हल्की होने के बजाय कम समय में अत्यधिक तेज होती है। इसके बाद लंबे ड्राई स्पेल आ जाते हैं। ऐसे में मिट्टी पानी को पर्याप्त मात्रा में सोख नहीं पाती और पानी तेजी से बहकर या भाप बनकर खत्म हो जाता है।

Share This Article