टैगोर की जयंती पर आयोजित कार्यक्रम में साहित्य, प्रकृति प्रेम और राष्ट्रवाद पर हुई चर्चा,
बहरागोड़ा , नोबेल पुरस्कार विजेता महान साहित्यकार रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर बहरागोड़ा में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखंड के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री डॉ दिनेश कुमार सारंगी ने अपने सहयोगियों के साथ कविगुरु टैगोर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर डॉ सारंगी ने टैगोर की प्रसिद्ध पंक्तियां “जोदी तोर डाक सुने केउ ना आसे, तोबे एकला चलो रे” का उल्लेख करते हुए कहा कि रवींद्रनाथ टैगोर बहुआयामी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने कहा कि टैगोर केवल कवि या साहित्यकार ही नहीं थे, बल्कि संगीत, लेखन, शिक्षा और समाज सुधार के क्षेत्र में भी उनका योगदान अतुलनीय रहा है।
डॉ सारंगी ने कहा कि टैगोर को प्रकृति से विशेष प्रेम था। उनकी रचनाओं में नदी, जंगल, झरने, पेड़-पौधे और पक्षियों का सुंदर वर्णन देखने को मिलता है। उन्होंने कहा कि शांतिनिकेतन टैगोर के प्रकृति प्रेम और भारतीय गुरुकुल परंपरा का जीवंत उदाहरण है।
उन्होंने आगे कहा कि टैगोर ने अपनी लेखनी के माध्यम से राष्ट्रवाद और मानवता की भावना को मजबूत करने का कार्य किया। उनकी रचनाएं आज भी समाज और नई पीढ़ी को प्रेरित करती हैं। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने भी टैगोर के विचारों को वर्तमान समय में प्रासंगिक बताते हुए उनके आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में सुदीप पटनायक, सगीर हुसैन, रवि दे, हुकुम महतो, पवन कालिंदी, सनत कर और बिजली आलम समेत कई लोग मौजूद रहे।










