रांची: झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कुख्यात ‘झांगुर ग्रुप’ के सरगना और पांच लाख रुपये के इनामी अपराधी रामदेव उरांव ने अपने दो सक्रिय साथियों के साथ पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। रांची और गुमला पुलिस की संयुक्त कार्रवाई के तहत शनिवार को यह बड़ी सफलता मिली।
गुप्त सूचना के बाद बनी संयुक्त टीम
रांची के वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) को सूचना मिली थी कि झांगुर ग्रुप का प्रमुख रामदेव उरांव अपने साथियों के साथ रांची-गुमला सीमा क्षेत्र में मौजूद है और आत्मसमर्पण करना चाहता है। सूचना के सत्यापन के बाद ग्रामीण एसपी के निर्देश पर बेड़ो डीएसपी दीपक कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। इधर, गुमला पुलिस को भी इसी तरह की सूचना मिलने पर एसपी के निर्देश पर घाघरा थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह और पुलिस अवर निरीक्षक विकास कुमार के नेतृत्व में सशस्त्र बल को सीमा क्षेत्र में भेजा गया।
सीमा क्षेत्र में पुलिस के सामने डाले हथियार
रांची और गुमला पुलिस की संयुक्त टीमों के संपर्क में आने के बाद तीनों ने स्वयं को झांगुर ग्रुप का सदस्य बताते हुए अपराध का रास्ता छोड़ने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि वे सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर समाज की मुख्यधारा में लौटना चाहते हैं। इसके बाद तीनों ने बिना किसी प्रतिरोध के आत्मसमर्पण कर दिया।
5 लाख का इनामी है रामदेव उरांव
आत्मसमर्पण करने वालों में झांगुर ग्रुप का सरगना रामदेव उरांव (47) शामिल है, जो गुमला जिले के बिशुनपुर थाना क्षेत्र के देवरागानी गांव का निवासी है। उस पर सरकार ने पांच लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसके साथ आत्मसमर्पण करने वाले दो अन्य सक्रिय सदस्य प्रसाद उरांव (24) और सुबास उरांव (23) भी उसी क्षेत्र के निवासी हैं। पुलिस के अनुसार दोनों गिरोह की गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं।
अत्याधुनिक हथियार और 45 जिंदा कारतूस बरामद
आत्मसमर्पण के दौरान पुलिस ने इनके कब्जे से हथियारों का जखीरा बरामद किया। जब्त सामान में एक स्वचालित हथियार, एक एसएलआर राइफल, दो मैगजीन और कुल 45 जिंदा कारतूस शामिल हैं। पुलिस के अनुसार इन हथियारों का उपयोग गिरोह रंगदारी वसूली और क्षेत्र में दहशत फैलाने के लिए करता था।
रामदेव पर 29 संगीन मामले दर्ज
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार रामदेव उरांव के खिलाफ हत्या, अपहरण, रंगदारी और आर्म्स एक्ट समेत करीब 29 गंभीर मामले दर्ज हैं। वर्ष 2000 में उसके खिलाफ पहला मामला दर्ज हुआ था। हाल के वर्षों में भी वह हत्या और बीएनएस व आर्म्स एक्ट से जुड़े मामलों में आरोपी रहा है। वहीं, प्रसाद उरांव पर हत्या और अपहरण समेत कई मामले दर्ज हैं, जबकि सुबास उरांव भी हालिया आपराधिक मामलों में सह-आरोपी रहा है।
कई अधिकारियों ने निभाई अहम भूमिका
इस संयुक्त अभियान में रांची की ओर से डीएसपी दीपक कुमार, पुलिस निरीक्षक उत्तम कुमार उपाध्याय, बेड़ो थाना प्रभारी मोहम्मद कफील अहमद, अवर निरीक्षक उत्तम कुमार पासवान और शौकत अली शामिल थे। गुमला की ओर से घाघरा थाना प्रभारी मोहन कुमार सिंह, अवर निरीक्षक विकास कुमार तथा दोनों जिलों के सशस्त्र बल के जवानों ने अभियान को सफल बनाया। पुलिस अधिकारियों ने इसे राज्य में उग्र एवं संगठित अपराध से जुड़े तत्वों को मुख्यधारा में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता बताया है।
