2009 से कोहाट एन्क्लेव में कैद थी पीड़िता: पिता की मौत की खबर तक छिपायी गयी
खूंटी, देश की राजधानी दिल्ली के सुभाष प्लेस थाना इलाके से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। झारखंड के खूंटी जिले की रहने वाली एक आदिवासी युवती को पिछले 17 वर्षों से दिल्ली में बंधक बनाकर रखा गया था, जहां न केवल उससे जबरन घरेलू मजदूरी कराई गई, बल्कि बार-बार उसका यौन शोषण भी किया गया।
इस सनसनीखेज मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने धारा 376 (दुष्कर्म) और 313 (जबरन गर्भपात) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इस भयावह दास्तां की शुरुआत साल 2009 में हुई थी, जब जेटा मुंडा नामक एक व्यक्ति पीड़िता को बेहतर काम दिलाने का झांसा देकर दिल्ली लाया था। उस वक्त युवती की उम्र महज 14-15 साल थी
जुल्म की पराकाष्ठा: जबरन गर्भपात
पीड़िता ने बताया कि घर में काम करने वाले एक व्यक्ति ने डरा-धमकाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। जब वह गर्भवती हुई, तो इंसाफ दिलाने के बजाय मकान मालिक की बहू और बेटी ने कथित तौर पर अस्पताल ले जाकर उसका जबरन गर्भपात करवा दिया।
युवती को कोहाट एन्क्लेव स्थित मधु अग्रवाल के घर पर घरेलू काम के लिए सौंप दिया गया, जिसके बाद वह 17 साल तक वहीं कैद रही। पीड़िता का आरोप है कि इस लंबे अंतराल के दौरान उसे उसके परिवार से बात तक नहीं करने दी गई। हद तो तब हो गई जब उसके पिता की मृत्यु की खबर भी उससे छिपाकर रखी गई ताकि वह घर जाने की जिद न करे।
पीड़िता ने दिल्ली पुलिस को दी गई अपनी शिकायत में आपबीती सुनाते हुए बताया कि उसके साथ गलत काम किया गया, जिसकी जानकारी मकान मालिक को होने के बावजूद कोई कानूनी कदम नहीं उठाया गया। जुल्मों का सिलसिला यहीं नहीं थमा, पीड़िता का आरोप है कि हाल ही में एक अन्य युवक ने भी उसके साथ दुष्कर्म किया।
मामले ने तब तूल पकड़ा जब पीड़िता के परिजन उसे वापस ले जाने दिल्ली पहुंचे। नवंबर 2025 में जब पीड़िता का भाई आया, तो उसे महज 10,000 रुपये देकर टाल दिया गया। इसके बाद 9 अप्रैल 2026 को जब परिजन दोबारा पहुंचे, तो मालिक ने 17 साल की कड़ी मजदूरी के बदले मात्र 1.40 लाख रुपये का डिमांड ड्राफ्ट और 15,000 रुपये नकद देकर मामले को रफा-दफा करने का दबाव बनाया।
वर्तमान में दिल्ली पुलिस के साथ-साथ खूंटी पुलिस भी सक्रिय हो गई है। महिला थाना प्रभारी फुलमनी टोप्पो ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर उन्हें भरोसा दिलाया है कि कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से पीड़िता को न्याय सुनिश्चित कराया जाएगा।








