झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा के सिलेबस में गढ़वा और पलामू जिले के लिए कुड़ूख भाषा को शामिल किए जाने के समर्थन में आदिवासी समाज एकजुट हो गया है। रविवार को गढ़वा प्रखंड के प्रकिया ग्राममें आदिवासी सरना विकास परिषद के जिलाध्यक्ष बीरेंद्र उरांव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में कुड़ूख भाषा का विरोध करने वाले राजनीतिक नेताओं की कड़े शब्दों में निंदा की गई।
कुड़ूख ‘क्षेत्रीय’ नहीं, ‘जनजातीय’ मातृभाषा है
बैठक को संबोधित करते हुए जिलाध्यक्ष बीरेंद्र उरांव ने स्पष्ट किया कि कुड़ूख उरांव जनजाति की मातृभाषा है और यह कोई क्षेत्रीय भाषा नहीं बल्कि आदिवासियों की पहचान है। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार द्वारा शिक्षक पात्रता परीक्षा में इसे शामिल करना एक स्वागत योग्य कदम है, लेकिन कुछ नेता अपने निजी स्वार्थ के लिए समाज को गुमराह कर रहे हैं।
दिग्गज नेताओं के विरोध की घोर निंदा
उरांव समाज ने गढ़वा विधायक सत्येन्द्रनाथ तिवारी, पूर्व मंत्री भानू प्रताप शाही और वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा कुड़ूख भाषा के विरोध में दिए गए बयानों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। बीरेंद्र उरांव ने कहा कि ये नेता बिना सच्चाई जाने अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं, जिससे समाज में गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि आदिवासी समाज अपनी भाषा और पहचान के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।
बैठक में भारी संख्या में उमड़ा जनसैलाब
इस अवसर पर उरांव आदिवासी समाज के सैकड़ों महिला-पुरुष और युवा उपस्थित थे। बैठक में मुख्य रूप से कार्यकारी सचिव मुखलाल उरांव, सचिव प्रदीप उरांव, उपाध्यक्ष कैलाश उरांव, कोषाध्यक्ष उमेश उरांव, और मझिआंव प्रखंड अध्यक्ष जगदीश उरांव सहित सोहराई, रामजीत, रंभा, शोभा, चंद्रिका और महेश उरांव जैसे कई सदस्य शामिल हुए। सभी ने एक स्वर में कुड़ूख भाषा के सम्मान की रक्षा करने का संकल्प लिया।
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