फिटनेस फंडा: जानें एक दिन में कितने किलोमीटर वॉक है सही और ज्यादा चलने के बड़े खतरे

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट रखने के लिए 'वॉक' (Walking) सबसे आसान और असरदार तरीका है।

Johar News Times
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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट रखने के लिए ‘वॉक’ (Walking) सबसे आसान और असरदार तरीका है। यह न सिर्फ आपके दिल (Heart Health) को दुरुस्त रखती है, बल्कि वजन कंट्रोल करने और मूड को फ्रेश रखने में भी मददगार है।

लेकिन, अक्सर लोगों के मन में यह सवाल जरूर घूमता है कि आखिर एक दिन में कितना चलना सही है? क्या जरूरत से ज्यादा चलने से शरीर को नुकसान भी पहुंच सकता है? हेल्थ वेबसाइट GoodRx के एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वॉक करने की सही लिमिट हर इंसान की उम्र, फिटनेस लेवल और हेल्थ कंडीशन पर निर्भर करती है। आइए जानते हैं क्या है वॉकिंग का सही गणित।

एक दिन में कितना चलना है सही?

अक्सर लोग 10,000 कदम (Daily 10K Steps) को ही फिटनेस का जादुई आंकड़ा मान लेते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स की राय इससे थोड़ी अलग है:

  • साप्ताहिक लक्ष्य: हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, एक वयस्क को हफ्ते में कम से कम 150 मिनट की मीडियम-इंटेंसिटी वॉक करनी चाहिए। यानी अगर आप हफ्ते में 6 दिन चलते हैं, तो रोजाना 25 मिनट की तेज वॉक (Brisk Walk) काफी है।
  • किलोमीटर में दूरी: समय और स्पीड के हिसाब से यह दूरी रोजाना 2 से 3 किलोमीटर के आसपास होती है।
  • 7,000 कदम भी हैं काफी: हालिया रिसर्च बताती हैं कि जो लोग रोजाना लगभग 7,000 कदम चलते हैं, उनमें अकाल मृत्यु का खतरा काफी कम हो जाता है। 7 हजार और 10 हजार कदम चलने वालों के हेल्थ बेनिफिट्स में बहुत ज्यादा अंतर नहीं देखा गया है। अब तो कुछ स्टडीज में 4,000 कदम को भी सेहत के लिए अच्छा माना जा रहा है।

जरूरत से ज्यादा चले तो क्या है खतरा?

‘अति हर चीज की बुरी होती है’—यह नियम वॉक पर भी लागू होता है। अगर आप शरीर की क्षमता से ज्यादा चलते हैं और बॉडी को रिकवरी का टाइम नहीं देते, तो आप ‘ओवरट्रेनिंग’ (Overexertion) के शिकार हो सकते हैं।

ज्यादा वॉक करने पर शरीर देता है ये रेड सिग्नल:

  • मांसपेशियों में लगातार दर्द: वॉक खत्म होने के लंबे समय बाद भी पैरों और मसल्स में दर्द बने रहना।
  • क्रोनिक थकान: हर समय शरीर का भारी रहना और लगातार कमजोरी महसूस होना।
  • इंजरी का डर: पैरों में बार-बार मोच आना, मांसपेशियों में खिंचाव या जॉइंट पेन होना।
  • मानसिक बदलाव: वॉक करने की इच्छा खत्म हो जाना, चिड़चिड़ापन बढ़ना और मूड स्विंग्स।
  • कमजोर इम्यूनिटी: भूख कम लगना और बार-बार सर्दी-जुकाम या इन्फेक्शन की चपेट में आना।

एक्सपर्ट एडवाइस: किसी नंबर के पीछे न भागें, शरीर की सुनें

फिटनेस एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी ‘जादुई आंकड़े’ (जैसे 10k स्टेप्स) के पीछे आंख बंद करके भागने से बेहतर है कि आप अपने शरीर के संकेतों को समझें:

  1. शुरुआत धीरे करें: अगर आप वॉक की शुरुआत कर रहे हैं, तो पहले कम दूरी और सामान्य स्पीड से शुरू करें। धीरे-धीरे अपना स्टैमिना बढ़ाएं।
  2. फिट लोग बढ़ाएं इंटेंसिटी: जो लोग पहले से फिट हैं, वे सिर्फ दूरी बढ़ाने के बजाय अपनी वॉक की स्पीड (गति) या फ्रीक्वेंसी में बदलाव कर सकते हैं।

वॉक उतनी ही करें जितनी आपकी बॉडी आराम से झेल सके। फिटनेस का मतलब शरीर को थकाना नहीं, बल्कि उसे ऊर्जावान बनाना है।

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