भारतीय रसोई में तड़के की खुशबू और छनछन करते पकवानों के बिना खानपान की कल्पना अधूरी मानी जाती है। सुबह के नाश्ते से लेकर रात के डिनर तक, हमारी अधिकांश पसंदीदा डिशेज तेल के भारी इस्तेमाल पर निर्भर हैं। स्वाद का यह सफर भले ही जुबान को संतुष्ट करता हो, लेकिन सेहत के मोर्चे पर इसकी एक बहुत बड़ी कीमत चुकानी पड़ रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की ताजा चेतावनियां बताती हैं कि खाने में जरूरत से ज्यादा तेल का इस्तेमाल साइलेंट किलर की तरह काम कर रहा है, जो शरीर को भीतर से खोखला कर गंभीर बीमारियों की तरफ धकेल रहा है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह अनहेल्दी आदत हमारी फिटनेस को किस तरह प्रभावित कर रही है और इससे बचने के उपाय क्या हैं।
भारत में 38 प्रतिशत लोग हर दिन खा रहे हैं अनहेल्दी फूड
हेल्थकेयर और डायग्नोस्टिक नेटवर्क ‘रेडक्लिफ लैब्स’ (Redcliffelabs) की एक हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में खानपान को लेकर बेहद चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इस रिपोर्ट के अनुसार:
- देश के करीब 38 प्रतिशत लोग नियमित रूप से अत्यधिक तले हुए स्नैक्स और प्रोसेस्ड फूड का सेवन करते हैं।
- इसके विपरीत, सिर्फ 28 प्रतिशत लोग ही ऐसे हैं जो अपनी डाइट में संतुलन बनाए रखते हैं और फल, सब्जियां व पोषक तत्वों से भरपूर चीजें खाते हैं।
विभिन्न अध्ययनों में यह भी सामने आया है कि भारतीय समाज में हाई-कैलोरी और ऑयली फूड खाने का चलन लगातार बढ़ रहा है।
लोग क्यों पसंद करते हैं तला-भुना खाना?
विशेषज्ञों का कहना है कि लोग अक्सर तला हुआ खाना इसलिए ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि इसका स्वाद तुरंत क्रेविंग को शांत करता है और मस्तिष्क में एक अच्छा अहसास पैदा करता है। लेकिन यही शॉर्ट-टर्म स्वाद, लॉन्ग-टर्म की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की मुख्य वजह बन जाता है।
ज्यादा ऑयली खाना खाने के मुख्य नुकसान
1. पाचन तंत्र पर सबसे पहला प्रहार
बहुत ज्यादा ऑयली खाना सबसे पहले आपके डाइजेशन को प्रभावित करता है। ज्यादा फैट वाले भोजन को पचाने में शरीर को सामान्य से कहीं ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे पाचन की प्रक्रिया काफी धीमी हो जाती है। यही कारण है कि लोगों को तला हुआ खाना खाने के बाद पेट भारी लगना, ब्लोटिंग, एसिडिटी और अपच जैसी शिकायतें होती हैं।
2. मानसिक स्वास्थ्य और मूड पर असर
सिर्फ पेट ही नहीं, ज्यादा ऑयली खाना आपके मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। रिपोर्ट्स बताती हैं कि प्रोसेस्ड और फ्राइड फूड में मौजूद अनहेल्दी ट्रांस फैट्स शरीर में सूजन (इन्फ्लेमेशन) बढ़ा सकते हैं, जो सीधे तौर पर दिमाग के कार्य करने के तरीके को प्रभावित करती है। कुछ शोधों में यह भी पाया गया है कि जो लोग ज्यादा फ्राइड फूड खाते हैं, उनमें डिप्रेशन और एंग्जायटी (घबराहट) के लक्षण दूसरों के मुकाबले ज्यादा होते हैं।
3. बढ़ता वजन और मोटापे का खतरा
लंबे समय तक ज्यादा तेल वाला खाना खाने से वजन तेजी से बढ़ता है। फ्राइड फूड में कैलोरी की मात्रा अत्यधिक होती है, जबकि शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व न के बराबर होते हैं। यही वजह है कि लगातार ऑयली डाइट लेने से इंसान मोटापे का शिकार हो जाता है, जो खुद कई अन्य बीमारियों की जड़ है।
4. दिल की सेहत के लिए बड़ा खतरा
ज्यादा तेल का सेवन हार्ट हेल्थ के लिए सबसे खतरनाक माना जाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इससे शरीर में एलडीएल (LDL) यानी बैड कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ती है और एचडीएल (HDL) यानी गुड कोलेस्ट्रॉल कम होता है। समय के साथ यह बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल धमनियों में प्लाक (ब्लॉकेज) के रूप में जमा होने लगता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है।
5. टाइप-2 डायबिटीज और फैटी लिवर
रिपोर्ट्स के अनुसार, जरूरत से ज्यादा तला-भुना भोजन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है, जो टाइप-2 डायबिटीज होने की एक बड़ी वजह है। इसके अलावा, भोजन के जरिए शरीर में जाने वाला अतिरिक्त फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे लोग फैटी लिवर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ जाते हैं।
सेहत सुधारने के लिए एक्सपर्ट्स की सलाह
राहत की बात यह है कि अपनी जीवनशैली और खानपान में छोटे-छोटे बदलाव करके सेहत में बड़ा सुधार लाया जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने इसके लिए कुछ मुख्य सुझाव दिए हैं:
- कुकिंग का तरीका बदलें: डीप फ्राई की गई चीजों की जगह बेक्ड (Baked) या ग्रिल्ड (Grilled) फूड को अपनी प्राथमिकता बनाएं। इससे तेल की खपत बेहद कम हो जाती है।
- डाइट में शामिल करें पोषक तत्व: खाने की थाली में हरी पत्तेदार सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज और नट्स जैसे हेल्दी फैट्स को शामिल करें।
