डुमरिया प्रखंड के ऊपर बांकिसोल क्षेत्र में एक नए क्रशर प्लांट का निर्माण कार्य शुरू किए जाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी फैल गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्लांट की स्थापना से पहले न तो राजस्व गांव के निवासियों को कोई जानकारी दी गई और न ही ग्राम प्रधान से किसी प्रकार की सहमति ली गई, जबकि क्षेत्र में किसी भी उद्योग या लघु उद्योग की स्थापना से पहले ग्रामसभा को सूचित किया जाना आवश्यक माना जाता है।
ग्राम प्रधान जगबंधु हांसदा ने बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि यह नया क्रशर प्लांट किसके द्वारा लगाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में पहले से ही एक क्रशर प्लांट संचालित है। ऐसे में एक और क्रशर प्लांट लगने से क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर और अधिक बढ़ने की आशंका है, जिससे ग्रामीणों का दैनिक जीवन प्रभावित हो सकता है और जीवनयापन कठिन हो सकता है।

स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि पहले से ही क्षेत्र में धूल और शोर प्रदूषण एक बड़ी समस्या है। अब दूसरा क्रशर प्लांट स्थापित होने से स्थिति और गंभीर हो जाएगी, जिसका सीधा असर जल, जंगल और जमीन पर पड़ेगा।
इस पूरे मामले में पेसा कानून का भी उल्लेख किया जा रहा है, जो राज्य में लागू है। इस कानून के तहत ग्रामसभा को सामुदायिक संसाधनों का संरक्षक माना गया है। पेसा कानून ग्रामसभा को यह अधिकार देता है कि वह अपने क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करे और ऐसे किसी भी कार्य का विरोध करे जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचा सकता हो।
कानूनी प्रावधानों के अनुसार क्रशर प्लांट से उत्पन्न होने वाला शोर और धूल प्रदूषण सीधे तौर पर गांव के पर्यावरण और जीवन पर प्रभाव डालता है। पेसा अधिनियम की धारा 4 (आई) के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में किसी भी विकास परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण से पहले ग्रामसभा से परामर्श लेना अनिवार्य है। बिना इस प्रक्रिया का पालन किए भूमि आवंटन को अवैध माना जाता है।
इसके बावजूद ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा और ग्राम प्रधान की अनुमति के बिना ही क्रशर प्लांट लगाने का कार्य आगे बढ़ाया जा रहा है। इस संबंध में अंचल अधिकारी (सीओ) पवन कुमार ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में आ चुका है और इसकी जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।










