सरायकेला-खरसावां जिले के राजनगर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में प्रसव के दौरान जच्चा-बच्चा की मौत के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। घटना के बाद तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और दोषियों पर कार्रवाई हो।
उपायुक्त नितीश कुमार सिंह के निर्देश पर गठित जांच टीम ने रविवार को अनुमंडल पदाधिकारी अभिनव प्रकाश के नेतृत्व में CHC पहुंचकर प्रारंभिक जांच की। इस दौरान घटना वाली रात की परिस्थितियों की पड़ताल की गई और ड्यूटी पर तैनात नर्सों तथा जनरेटर ऑपरेटर से गहन पूछताछ की गई। हालांकि उस समय ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक डॉ. शिवशंकर कुंकल मौके पर नहीं मिले। एसडीओ ने उन्हें और प्रसव में शामिल अन्य नर्सिंग स्टाफ को तलब कर अलग से पूछताछ करने की बात कही है।
प्रारंभिक जांच में प्रशासन का मुख्य फोकस इस बात पर रहा कि बिजली बाधित होने के बावजूद अस्पताल में उपलब्ध वैकल्पिक व्यवस्थाओं, सोलर सिस्टम, इन्वर्टर और जनरेटर का उपयोग क्यों नहीं किया गया। एसडीओ ने इन व्यवस्थाओं का निरीक्षण कर संबंधित कर्मियों से जवाब-तलब किया।
पूछताछ के दौरान पूर्व चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अर्जुन सोरेन ने बताया कि घटना की रात सोलर बैटरी चार्ज नहीं थी और लंबे समय से उपयोग नहीं होने के कारण जनरेटर भी सही स्थिति में नहीं था। इस पर एसडीओ ने नाराजगी जताते हुए स्पष्ट कहा कि ऐसी लापरवाही किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। साथ ही जनरेटर के रखरखाव और ईंधन पर हुए खर्च की भी जांच के निर्देश दिए गए हैं।
जांच के बाद एसडीओ अभिनव प्रकाश ने कहा कि प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है और विस्तृत जांच जारी है। ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्सों से पूछताछ के बाद रिपोर्ट उपायुक्त को सौंपी जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।










