मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने धार स्थित भोजशाला–कमाल मौला मस्जिद विवाद में महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए भोजशाला को मां वाग्देवी का मंदिर माना है और हिंदू पक्ष को वहां पूजा का अधिकार दे दिया है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध ऐतिहासिक और पुरातात्विक तथ्यों से यह स्पष्ट होता है कि यह स्थान राजा भोज के समय शिक्षा, संस्कृति और धार्मिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा होगा। हाईकोर्ट की डबल बेंच ने पांच याचिकाओं और तीन हस्तक्षेप आवेदनों पर सुनवाई के बाद यह निर्णय दिया। कोर्ट ने एएसआई रिपोर्ट, ऐतिहासिक दस्तावेज, दोनों पक्षों की दलीलें और पूर्व न्यायिक फैसलों (अयोध्या मामले सहित) पर विचार किया।
एएसआई का पुराना आदेश रद्द
अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के उस पुराने आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें मुस्लिम पक्ष को वहां नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई थी। फैसले के बाद हिंदू पक्ष में खुशी और मुस्लिम पक्ष में असहमति देखने को मिली। मुस्लिम पक्ष के शहर काजी वकार सादिक ने कहा कि वे फैसले का अध्ययन कर सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे और एएसआई की रिपोर्ट पर भी सवाल उठाए।
सरकार की जिम्मेदारियों पर टिप्पणी
हाईकोर्ट ने सरकार को निर्देश देते हुए कहा कि ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों का संरक्षण सुनिश्चित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। साथ ही श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने यह भी कहा कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है तथा सभी पक्षों को शांति और सौहार्द बनाए रखना चाहिए।
मां वाग्देवी की प्रतिमा का उल्लेख
फैसले में कहा गया कि वर्ष 1875 में खुदाई के दौरान मां वाग्देवी की प्रतिमा मिली थी, जिसे ब्रिटिश शासन के दौरान इंग्लैंड ले जाया गया और वर्तमान में वह लंदन में सुरक्षित है। हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए प्रभावी प्रयास किए जाएं।
सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
फैसले से पहले धार, इंदौर और आसपास के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया और सोशल मीडिया पर निगरानी रखी गई ताकि कोई अफवाह या तनाव न फैले। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
भोजशाला विवाद राज्य के सबसे चर्चित मामलों में से एक है और इस फैसले के बाद अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट पर टिकी हैं, जहां मुस्लिम पक्ष अपील करने की तैयारी में है।
