जमशेदपुर , बहरागोड़ा प्रखंड के खांडामौदा गांव की 13 वर्षीय प्रियंका कर ने अपनी मेहनत और लगन के दम पर नेशनल क्रिकेट में पहचान बनाकर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। गांव की गलियों से निकलकर अंडर-15 स्तर तक पहुंचने वाली प्रियंका अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम में जगह बनाने का सपना देख रही हैं।
महज 9 साल की उम्र में क्रिकेट अकादमी से जुड़ने वाली प्रियंका रोज करीब 50 किलोमीटर का सफर तय कर घाटशिला स्थित क्रिकेट अकादमी पहुंचती हैं। छोटी उम्र से ही क्रिकेट के प्रति उनका जुनून देखने लायक रहा है। प्रियंका बताती हैं कि जब वह लगभग चार साल की थीं, तभी से उन्हें बल्ला पकड़ने और क्रिकेट देखने का शौक हो गया था।
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी उनके आदर्श हैं। धोनी की बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग शैली से प्रेरित होकर ही उनमें क्रिकेट के प्रति गहरा लगाव पैदा हुआ।
पिता बने कोच और दोस्त
प्रियंका के पिता देबराज कर पेशे से शिक्षक हैं, लेकिन युवावस्था में वे खुद भी अच्छे क्रिकेटर रह चुके हैं। उन्होंने ओडिशा, बिहार और झारखंड के कई मैदानों में क्रिकेट खेला है। प्रियंका की मां रीता रानी महापात्रा गृहिणी हैं और उन्होंने भी बेटी को हर कदम पर प्रोत्साहित किया।
प्रियंका का कहना है कि उनके पिता ने सिर्फ अभिभावक ही नहीं, बल्कि एक सच्चे कोच और दोस्त की भूमिका निभाई। परिवार के सहयोग और लगातार मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया।
कोच निशीकांत कुमार ने निखारी प्रतिभा
बहरागोड़ा क्रिकेट अकादमी के कोच निशीकांत कुमार ने प्रियंका को क्रिकेट की बारीकियां सिखाईं। उनकी कड़ी मेहनत का ही परिणाम है कि महज 13 वर्ष की उम्र में प्रियंका ने विशाखापट्टनम में आयोजित अंडर-15 नेशनल स्टेट क्रिकेट प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और अपने गांव, जिले व राज्य का नाम रोशन किया।
प्रियंका कर की सफलता आज ग्रामीण क्षेत्रों की उन बेटियों के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने का साहस रखती हैं।











