ममता बनर्जी को एक बार फिर पार्टी के भीतर असंतोष का सामना करना पड़ा है। भवानीपुर सीट पर हार और विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस के कमजोर प्रदर्शन के बाद पार्टी के अंदर नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है। कालीघाट स्थित आवास पर बुलाई गई बैठक में कई वरिष्ठ विधायकों ने पार्टी नेतृत्व और संगठन के कामकाज पर सवाल उठाए। बताया जा रहा है कि बैठक के दौरान पार्टी के कुछ नेताओं ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की, जबकि ममता बनर्जी और सांसद अभिषेक बर्नजी पूरे समय चुपचाप सुनते रहे।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पार्टी नेताओं कुनाल घोष, रिताब्रता बनर्जी और संदीपन साहा ने बैठक में संगठन की कार्यशैली को लेकर नाराजगी जताई। नेताओं का आरोप था कि कई फैसले पार्टी कार्यकर्ताओं और विधायकों की राय लिए बिना थोपे गए, जिससे जनता के बीच गलत संदेश गया और पार्टी को चुनाव में नुकसान उठाना पड़ा। बैठक में फालता सीट से जहांगीर खान का नामांकन वापस लेने के मुद्दे पर भी सवाल उठाए गए।
सूत्रों के अनुसार, नेताओं ने कहा कि पार्टी को सिर्फ बंद कमरे की बैठकों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जनता के बीच जाकर सक्रिय राजनीति करनी चाहिए। कुणाल घोष ने कथित तौर पर कहा कि अब समय आ गया है कि पार्टी नेता सड़कों पर उतरकर लोगों के मुद्दों पर संघर्ष करें। उन्होंने बीजेपी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि गरीबों और कमजोर वर्गों को “बुलडोजर राजनीति” से बचाने के लिए विपक्ष को मजबूत तरीके से मैदान में उतरना होगा।
बैठक के दौरान पार्टी नेतृत्व की नाराजगी भी साफ नजर आई, लेकिन किसी ने सार्वजनिक तौर पर जवाब नहीं दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में कुल 80 विधायकों में से 15 विधायक अनुपस्थित रहे, जिसने पार्टी के भीतर बढ़ती दूरी और असंतोष की चर्चाओं को और तेज कर दिया है।
गौरतलब है कि साल 2021 में भी ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से हार का सामना करना पड़ा था, हालांकि उस समय तृणमूल कांग्रेस ने राज्य में भारी बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। लेकिन 2026 विधानसभा चुनाव में पार्टी को बड़ा झटका लगा। भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को सुवेंदु अधिकारी के हाथों हार मिली, जबकि टीएमसी केवल 80 सीटों पर सिमट गई। दूसरी ओर भाजपा ने राज्य में बहुमत हासिल कर सरकार बनाई और शुभेंदु अधिकारी मुख्यमंत्री बने।
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