कपाली ओपी मामला: आदिवासी युवती पर पुलिसिया बर्बरता के खिलाफ 22 जून को एसपी कार्यालय पर महाधरना

आगामी 22 जून 2026 को समस्त आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के समक्ष एकजुट होकर जोरदार धरना-प्रदर्शन करेंगे।

Johar News Times
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सरायकेला-खरसावां जिले के कपाली ओपी (आउटपोस्ट) क्षेत्र में एक आदिवासी महली युवती के साथ पुलिसिया अत्याचार और अभद्र व्यवहार के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए महली आदिवासी समाज सहित झारखंड के विभिन्न आदिवासी और सामाजिक संगठनों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। आगामी 22 जून 2026 को समस्त आदिवासी समाज के प्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधि सरायकेला-खरसावां के पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय के समक्ष एकजुट होकर जोरदार धरना-प्रदर्शन करेंगे।

‘न्याय और आदिवासी अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्ष रहेगा जारी’

आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह प्रदर्शन पूरी तरह से शांतिपूर्ण, लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीकों से किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि कानून के रक्षकों द्वारा कानून का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि दोषी पुलिसकर्मियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं होती है, तो समाज व्यापक जनांदोलन के लिए बाध्य होगा।

इस आंदोलन को दिनकर कच्छप, शंकर सेन माहली, नारायण महतो, राहुल माहली, इंदर हेंब्रम, सत्य नारायण मुर्मू, लालतु महतो, अजय जामुदा, परशुराम महतो, रबीन्द्रनाथ सिंह सहित कई प्रमुख बुद्धिजीवियों और जनप्रतिनिधियों का खुला समर्थन मिला है।

पुलिसिया कार्यशैली पर उठ रहे गंभीर सवाल

आदिवासी समाज ने जिले की कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कपाली ओपी में युवती से मारपीट के अलावा, चांडिल थाना द्वारा प्राथमिकी (FIR) दर्ज करने में बाधा उत्पन्न करने और हाल ही में कुकरू व नीमडीह में हुई दो महिलाओं की संदिग्ध मौतों पर पुलिस की चुप्पी को लेकर जनाक्रोश चरम पर है। इसके साथ ही 12 जून 2026 को एक भूमिज महिला पर हुए पुलिसिया हमले का मामला भी गरमाया हुआ है।

समाज ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राज्य सरकार, पुलिस महानिदेशक (DGP), राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) से त्वरित हस्तक्षेप और निष्पक्ष जांच की मांग की है।

आदिवासी समाज की प्रमुख 8 सूत्री मांगें:

  1. उच्चस्तरीय न्यायिक जांच: कपाली ओपी प्रकरण की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराई जाए।
  2. सख्त दंडात्मक कार्रवाई: दोषी पुलिसकर्मियों को केवल निलंबित करने से समाज संतुष्ट नहीं है; उन पर कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
  3. पीड़िता को सुरक्षा और इलाज: पीड़िता को बेहतर चिकित्सा सुविधा और उसके परिवार को तत्काल सुरक्षा दी जाए।
  4. लापरवाह अधिकारियों पर एक्शन: चांडिल थाना में प्राथमिकी दर्ज करने में बाधा खड़ी करने वाले जिम्मेदार पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
  5. SC/ST एक्ट के तहत मामला: अनुसूचित जनजाति समुदाय की महिलाओं की गरिमा की रक्षा करते हुए दोषियों पर SC/ST (Prevention of Atrocities) Act के तहत मुकदमा दर्ज हो।
  6. भूमिज महिला को न्याय: 12 जून 2026 को भूमिज महिला पर हमला करने वाले पुलिसकर्मी पर कानूनी एक्शन लिया जाए।
  7. संदिग्ध मौतों की जांच: कुकरू एवं नीमडीह में हुई महिलाओं की संदिग्ध मौतों की निष्पक्ष जांच कर सच सामने लाया जाए।

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