लोकप्रिय और सुरक्षित मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम को लेकर केंद्र सरकार और कंपनी के बीच कानूनी खींचतान अब और तेज हो गई है। हाई कोर्ट में चल रही एक महत्वपूर्ण सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने टेलीग्राम को लेकर बेहद गंभीर और चौंकाने वाले दावे किए हैं। सरकार ने अदालत से कहा कि टेलीग्राम अब आतंकवादी गतिविधियों, अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध और अवैध सिंडिकेट के संचालन के लिए सबसे आसान और सुविधाजनक माध्यम बन चुका है। राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई संवेदनशील मामलों में इस प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल को लेकर गंभीर चिंताएं जताई गई हैं।
कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई थी हाई-लेवल समीक्षा
केंद्र सरकार ने हाई कोर्ट को अवगत कराया कि टेलीग्राम से जुड़े सुरक्षा खतरों की गंभीरता को देखते हुए कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति ने देश की सुरक्षा, कानून-व्यवस्था और डिजिटल संचार पर पड़ने वाले प्रभावों का गहराई से अध्ययन किया। समिति की इसी गोपनीय और विस्तृत रिपोर्ट के आधार पर ही टेलीग्राम के खिलाफ आगे की कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की गई है।
सुनवाई की प्रक्रिया पर कोर्ट ने उठाया सवाल
सुनवाई के दौरान माननीय हाई कोर्ट ने सरकार से एक प्रक्रियात्मक सवाल पूछा कि आपातकालीन शक्तियों के इस्तेमाल की स्थिति में, क्या संबंधित पक्ष को नियमानुसार 48 घंटे के भीतर अपनी बात रखने या सुनवाई का अवसर दिया गया था?
इस पर केंद्र सरकार ने पूरी मजबूती से अपना पक्ष रखते हुए कोर्ट को आश्वस्त किया कि टेलीग्राम को अपनी दलीलें पेश करने का पूरा और उचित अवसर दिया गया था। कंपनी से मिले जवाबों की जांच के बाद ही सभी तय कानूनी प्रक्रियाओं का कड़ाई से पालन करते हुए यह निर्णय लिया गया है।
अगले फैसले पर टिकी निगाहें
डिजिटल सुरक्षा और अभिव्यक्ति की आजादी के बीच संतुलन को लेकर यह मामला बेहद महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गया है। सरकार की ओर से पेश किए गए इन तीखे तर्कों के बाद अब देश की तकनीकी दुनिया और कानूनी हलकों की नजरें हाई कोर्ट की अगली सुनवाई और आने वाले संभावित फैसले पर टिकी हैं ।
