कहते हैं कि अगर मेहनत, लगन और आधुनिक तकनीक का सही तालमेल हो, तो खेती को सबसे मुनाफे वाले व्यवसाय में बदला जा सकता है। इसे सच कर दिखाया है जामताड़ा जिले के नाला प्रखंड स्थित मथुरा गांव के प्रगतिशील किसान निर्मल माजी ने। उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प और अथक परिश्रम के बल पर आम की बागवानी में एक ऐसी सफलता हासिल की है, जो आज पूरे राज्य के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुकी है।
- 15 एकड़ में फैले 1500 पेड़: निर्मल माजी ने साल 2009-10 में राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 15 एकड़ भूमि पर आम की बागवानी की शुरुआत की थी। आज उनके इस विशाल बागान में 1500 से अधिक फलदार आम के पेड़ लहलहा रहे हैं।
- दुनिया का सबसे महंगा आम ‘मियाजाकी’ भी शामिल: उनके बागान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहाँ जापान की विश्व प्रसिद्ध और बेहद महंगी ‘मियाजाकी’ किस्म के आम के पेड़ भी मौजूद हैं। इसके अलावा बागान में मालदा, हीमसागर, गुलाब खास, मल्लिका, जरदालु, दूधिया, लंगड़ा, स्वर्णरेखा, अम्रपाली, अंबिका और शुगर फ्री सेंसेशन जैसी कई उन्नत किस्में उगाई जा रही हैं।
चुनौतियों को मात देकर बने ‘रोल मॉडल’
शुरुआती दौर में निर्मल माजी को कई तरह की समस्याओं और चुनौतियों का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कृषि विशेषज्ञों से समय-समय पर वैज्ञानिक प्रशिक्षण लिया। आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उन्होंने पारंपरिक खेती को आधुनिक बागवानी में बदल दिया।
सालाना लाखों की कमाई, स्थानीय लोगों को मिल रहा रोजगार
निर्मल माजी आज आम के उत्पादन से हर साल लाखों रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर रहे हैं। उनके इस प्रयास से न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि उन्होंने क्षेत्र के कई ग्रामीण मजदूरों को रोजगार भी दिया है। आम के सीजन में बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीणों को काम मिलता है, जिससे पूरे गांव को आर्थिक संबल मिल रहा है।
तीन राज्यों के बाजारों में मथुरा गांव के आमों की धूम
मथुरा गांव के आमों की गुणवत्ता और बेमिसाल स्वाद के कारण बाजार में इनकी जबरदस्त मांग है। व्यापारी सीधे निर्मल माजी के बागान पहुंचकर आमों की एडवांस खरीदारी कर रहे हैं। यहाँ के आम झारखंड, पश्चिम बंगाल और बिहार के विभिन्न बड़े बाजारों तक सप्लाई किए जा रहे हैं। इस वर्ष भी बागान में बंपर पैदावार हुई है, जिससे किसान और व्यापारी दोनों बेहद उत्साहित हैं।
निर्मल माजी को उनकी इस उत्कृष्ट और वैज्ञानिक खेती के लिए जिला एवं राज्य स्तर की कई कृषि प्रदर्शनियों में सम्मानित किया जा चुका है। उनकी यह कहानी साबित करती है कि अगर युवा किसान तकनीक का सही इस्तेमाल करें, तो खेती से भी बेहतर करियर और मुनाफा बनाया जा सकता है।
