JAC की भारी लापरवाही: रिजल्ट के एक महीने बाद भी नहीं पहुंचीं मैट्रिक-इंटर की मार्कशीट, अधर में लटका छात्रों का एडमिशन

रिजल्ट देकर सो गया जैक! मूल प्रमाण पत्र के लिए स्कूलों के चक्कर काट रहे छात्र और अभिभावक।

Johar News Times
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झारखंड एकेडमिक काउंसिल की सुस्त कार्यप्रणाली एक बार फिर राज्य के लाखों छात्र-छात्राओं के भविष्य पर भारी पड़ती दिख रही है। जैक द्वारा मैट्रिक परीक्षा का परिणाम 23 अप्रैल 2026 और इंटरमीडिएट का रिजल्ट 6 मई को ही जारी कर दिया गया था, लेकिन इसके बावजूद अब तक कई स्कूलों और कॉलेजों में छात्रों की मूल मार्कशीट और जरूरी प्रमाण पत्र नहीं पहुंच सके हैं। इस भारी देरी के कारण इंटर और डिग्री कॉलेजों में चल रही नामांकन प्रक्रिया पूरी तरह प्रभावित हो रही है।

मार्कशीट के बिना स्कूल नहीं दे रहे SLC, छात्र काट रहे चक्कर

जैक की इस सुस्ती का खामियाजा छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ रहा है। मूल मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और अन्य आवश्यक दस्तावेज स्कूलों तक नहीं पहुंचने के कारण स्कूल प्रबंधन भी छात्रों को स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट या कॉलेज लीविंग सर्टिफिकेट जारी नहीं कर पा रहा है।

परिणामस्वरूप, चिलचिलाती धूप में छात्र और अभिभावक हर दिन अपनी मार्कशीट की आस में स्कूलों के चक्कर लगाने को मजबूर हैं।

इस लेती-लतीफी से सबसे ज्यादा परेशान वो विद्यार्थी हैं, जो अच्छे अंकों से पास हुए हैं और जिन्हें:

  • दूसरे जिलों या राज्य के प्रतिष्ठित प्लस टू स्कूलों/इंटर कॉलेजों में जाना है।
  • दिल्ली, मुंबई या अन्य राज्यों के केंद्रीय विश्वविद्यालयों व तकनीकी संस्थानों में दाखिला लेना है।

हालांकि, राज्य के कई इंटर कॉलेज फिलहाल प्रोविजनल आधार पर अंकपत्र की इंटरनेट कॉपी देखकर नामांकन ले रहे हैं, लेकिन अन्य बड़े बोर्डों और प्रतिष्ठित संस्थानों में मूल प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य शर्त है। ऐसे में छात्रों को डर सता रहा है कि देरी की वजह से कहीं उनका पसंदीदा कॉलेज हाथ से न निकल जाए।

डाटा सेंटर से जैक ऑफिस तक ही नहीं पहुंचे पैकेट!

इस लेती-लतीफी के पीछे का तकनीकी और प्रशासनिक कारण बेहद चौंकाने वाला है। एक प्रतिष्ठित प्लस टू स्कूल के प्राचार्य ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:

“गड़बड़ी की जड़ यह है कि प्रिंटिंग और डेटा सेंटर से अब तक विद्यार्थियों के पंजीयन, एडमिट कार्ड, मार्कशीट, माइग्रेशन सर्टिफिकेट और क्रॉस लिस्ट जैक के मुख्य कार्यालय तक ही नहीं पहुंची है।”

दस्तावेज पहुँचने की क्या है लंबी प्रक्रिया?

  1. डेटा सेंटर से कागजात पहले JAC मुख्यालय आएंगे।
  2. मुख्यालय में सभी स्कूलों के अनुसार अलग-अलग पैकेट तैयार किए जाएंगे।
  3. इन पैकेट्स को सभी जिलों के जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय भेजा जाएगा।
  4. डीईओ कार्यालय से संबंधित स्कूलों के प्रचार्य इसे कलेक्ट करेंगे, तब जाकर यह छात्रों को मिलेगी।

इस लंबी और कछुआ गति से चलने वाली प्रक्रिया को देखकर आशंका जताई जा रही है कि छात्रों के हाथों में मूल प्रमाण पत्र आने में अभी और वक्त लग सकता है, जिससे राज्य भर के अभिभावकों में जैक प्रबंधन के खिलाफ भारी आक्रोश है।

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