झोपड़ी में 50 मेडल, माँ मजदूर और भाई को लकवा: झारखंड की स्टार फुटबॉलर दिव्यानी लिंडा के संघर्ष के आगे झुकी सरकार, मिलेगा नया घर और भाई का मुफ्त इलाज

झोपड़ी से चैंपियन बनने का सफर: फुटबॉलर दिव्यानी लिंडा की सुध लेने पहुंचे केंद्रीय मंत्री।

Johar News Times
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झारखंड की माटी से निकलने वाली खेल प्रतिभाएं आज किसी परिचय की मोहताज नहीं हैं। अपनी अद्भुत खेल प्रतिभा के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन करने वाली झारखंड की अंडर-17 महिला फुटबॉलर दिव्यानी लिंडा के संघर्ष और बेबसी की कहानी जब सामने आई, तो सरकार भी मदद के लिए आगे आई है।

गुरुवार को केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने रांची में दिव्यानी लिंडा और उनके परिवार से मुलाकात की। मंत्री ने इस होनहार खिलाड़ी के हौसले को सलाम करते हुए उनके लकवाग्रस्त भाई के इलाज, परिवार को नया पक्का मकान देने और गांव में खेल के मैदान के निर्माण की बड़ी घोषणाएं कीं।

“विकसित भारत की ब्रांड एंबेसडर है दिव्यानी”, टूटी झोपड़ी में रखे हैं 50 से अधिक मेडल

दिव्यानी के घर की स्थिति देखकर भावुक हुए केंद्रीय मंत्री संजय सेठ ने उसे “विकसित भारत की ब्रांड एंबेसडर” बताया। उन्होंने कहा:

“यह देखना चकित और गौरवान्वित करने वाला है कि जिस छोटी सी कच्ची झोपड़ी में रहने को यह परिवार मजबूर है, वहां दिव्यानी के जीते हुए 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय-राष्ट्रीय मेडल और ट्रॉफियां सजी हुई हैं। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी देश का मान बढ़ाना एक अद्भुत और अद्वितीय उपलब्धि है।”

दिव्यानी की पारिवारिक स्थिति बेहद मार्मिक है। चार साल पहले उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद पूरे परिवार की जिम्मेदारी उनकी माँ पर आ गई, जो एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करके घर चलाती हैं। वहीं दिव्यानी का भाई कमर के नीचे से पूरी तरह लकवे (Paralysis) का शिकार है और बिस्तर पर है।

प्रशासन और सरकार द्वारा की गई बड़ी घोषणाएं:

  • दिव्यानी के बीमार भाई को तुरंत राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान में भर्ती कराया जाएगा, जहाँ उसका पूरा इलाज मुफ्त होगा।
  • मंत्री ने घोषणा की है कि आने वाली दुर्गा पूजा से पहले इस स्टार खिलाड़ी के परिवार को एक सुंदर और पक्का नया घर उपलब्ध करा दिया जाएगा।
  • दिव्यानी के गांव में एक आधुनिक खेल मैदान का निर्माण कराया जाएगा, ताकि क्षेत्र की अन्य ग्रामीण और प्रतिभाशाली लड़कियों को भी फुटबॉलर बनने के लिए बेहतर ट्रेनिंग मिल सके।

सुबह 4 बजे उठकर चोरी-छिपे अभ्यास: SAFF चैंपियन बनने तक का सफर

अपनी खेल यात्रा को याद करते हुए दिव्यानी लिंडा ने बताया कि उन्हें बचपन से ही फुटबॉल का जुनून था। शुरुआत में उनकी माँ चोट लगने के डर से उन्हें खेलने से मना करती थीं, लेकिन देश के लिए खेलने की जिद ऐसी थी कि वह रोज सुबह अंधेरे में 4 बजे उठकर मैदान पर प्रैक्टिस करने निकल जाती थीं। उनकी इसी कड़ी मेहनत का नतीजा रहा कि:

  1. उन्होंने 2024 के अंडर-16 सैफ टूर्नामेंट में भारत का प्रतिनिधित्व किया, जहाँ भारतीय टीम उपविजेता रही।
  2. इसके बाद भूटान में आयोजित अंडर-17 सैफ टूर्नामेंट में उन्होंने शानदार खेल दिखाया और भारतीय टीम चैंपियन बनी।
  3. उन्होंने किर्गिस्तान में एएफसी टूर्नामेंट और चीन में हुए क्वालीफाइंग राउंड में भारतीय टीम को क्वार्टर फाइनल तक पहुँचाने में मुख्य भूमिका निभाई।

सपना है सीनियर टीम से वर्ल्ड कप खेलना दिव्यानी ने गर्व से कहा कि उनका अंतिम सपना भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में अपनी पक्की जगह बनाना, भारत की तरफ से वर्ल्ड कप खेलना और देश को विश्व स्तर पर चैंपियन बनाना है। सरकार की इस मदद के बाद अब दिव्यानी बिना किसी पारिवारिक चिंता के अपने खेल पर पूरा ध्यान केंद्रित कर सकेंगी।

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