जिले के नावागढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत बिनगाड़ा गांव और कोने पंचायत में वन पट्टे को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। कुछ रसूखदार लोगों पर फर्जी ग्राम सभा आयोजित कर अवैध तरीके से वन पट्टा हासिल करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले को लेकर स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए लातेहार के उपायुक्त , जिला कल्याण पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक को एक संयुक्त आवेदन सौंपा है। ग्रामीणों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
नियमों को ताक पर रखकर बनाया फर्जी दस्तावेज
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के ही कुछ चुनिंदा लोगों ने निजी स्वार्थ के लिए नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया। उन्होंने मतदाता सूची से ग्रामीणों के नाम उठाकर एक फर्जी उपस्थिति पंजी तैयार की और बिना किसी को सूचना दिए ‘कागजी’ ग्राम सभा आयोजित कर ली। इसके माध्यम से प्रशासन को गुमराह किया गया और वन पट्टा हासिल कर लिया गया।
“जिस जमीन का वन पट्टा लिया गया है, वह वर्षों से गांव की सार्वजनिक संपत्ति रही है। हमारे पूर्वजों ने इसे सामुदायिक उपयोग के लिए सुरक्षित रखा था। इस जमीन से ग्रामीणों की धार्मिक और सामाजिक आस्था जुड़ी हुई है।” — आक्रोशित ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, इस जमीन पर पारंपरिक रूप से बेंगा, पाहन एवं पुनार जैसे सामुदायिक व धार्मिक कार्य होते आ रहे हैं।
इन लोगों पर लगा है फर्जीवाड़े का आरोप
प्रशासन को सौंपे गए आवेदन में ग्रामीणों ने मुख्य रूप से निम्नलिखित लोगों को नामजद करते हुए फर्जीवाड़ा करने का आरोप लगाया है:
- सुरेन्द्र सोगरा
- नन्देव लोहरा
- राजेन्द्र लोहरा
- शंकर लोहरा
- गोपाल लोहरा
- संदीप लोहरा
- संकेन्द्र सोगरा
- जितेन्द्र लोहरा
- देवन्ती देवी व अन्य।
ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि इस कथित ग्राम सभा की कोई वैधानिक सूचना गांव में नहीं दी गई थी और न ही अधिकांश ग्रामीणों को इसकी भनक तक थी।
एक साल बाद भी कार्रवाई नहीं, आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने बताया कि यह मामला नया नहीं है। इससे पहले 12 मई 2024 को जनता दरबार में भी इस संबंध में आवेदन दिया गया था। उस समय प्रशासन ने त्वरित जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया था, लेकिन एक वर्ष से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
प्रशासनिक शिथिलता के कारण गांव में सामाजिक तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि:
- ग्राम सभा रजिस्टर, उपस्थिति पंजी और प्रस्ताव प्रतिलिपि की निष्पक्ष जांच हो।
- फर्जी तरीके से जारी किए गए वन पट्टे को तत्काल निरस्त किया जाए।
- जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो ताकि ग्रामीणों का प्रशासन पर भरोसा बना रहे।
आवेदन सौंपने वालों में मुख्य रूप से: दशरथ सिंह, रमेश सिंह, अवधेश साह, भोला यादव, हरिहर सिंह, राजकुमारी देवी, गंगेश्वर सिंह, रामसेवक सिंह, कमलेश सिंह एवं रणबिहारी सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल थे। ग्रामीणों ने दोटूक कहा है कि यदि उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
