ऑनलाइन दवा बिक्री और ई-फार्मेसी के विरोध में उतरे दवा विक्रेता, कई राज्यों में असर
ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के आह्वान पर आज देशभर में केमिस्टों की हड़ताल की गई। संगठन ने ई-फार्मेसी और ऑनलाइन दवा बिक्री के विरोध में यह राष्ट्रव्यापी बंद बुलाया है। दावा किया गया है कि इस हड़ताल में देशभर के करीब 12.5 लाख मेडिकल स्टोर शामिल हैं, जबकि बिहार में लगभग 40 हजार केमिस्टों ने समर्थन दिया है।
ई-फार्मेसी के खिलाफ सख्त नियमों की मांग
केमिस्ट संगठनों का आरोप है कि कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बिना पर्याप्त निगरानी और सत्यापन के दवाओं की बिक्री कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे मरीजों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है और पारंपरिक दवा कारोबार भी प्रभावित हो रहा है। संगठन के अनुसार, ऑफलाइन मेडिकल स्टोर प्रिस्क्रिप्शन आधारित नियमों का पालन करते हैं और एंटीबायोटिक्स, नशीली दवाओं तथा गर्भपात किट जैसी संवेदनशील दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखते हैं, जबकि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निगरानी उतनी सख्त नहीं है।
कौन-कौन सी दुकानें खुली रहेंगी
हड़ताल के बावजूद कई बड़ी फार्मेसी चेन, अस्पतालों के मेडिकल स्टोर, प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के तहत संचालित जन औषधि केंद्र और अमृत फार्मेसी खुले रहेंगे। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब, महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा, गुजरात, छत्तीसगढ़, सिक्किम, उत्तराखंड और लद्दाख के कई फार्मेसी संगठनों ने भी इस बंद से दूरी बनाई है। हालांकि मध्य प्रदेश और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में हड़ताल का असर ज्यादा देखने को मिल सकता है।
AIOCD ने सरकार के सामने रखीं ये मांगें
हाल ही में राष्ट्रीय दवा नियामक अधिकारियों के साथ हुई बैठक में AIOCD ने ऑनलाइन दवा बिक्री के लिए सख्त और स्पष्ट नियम बनाने की मांग उठाई। संगठन के प्रतिनिधि प्रभाकर कुमार ने कहा कि बिना डॉक्टर के पर्चे के दवाओं की बिक्री गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है। उन्होंने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर भी वही नियम लागू होने चाहिए जो खुदरा दवा विक्रेताओं पर लागू होते हैं।

आम लोगों पर क्या पड़ेगा असर
हड़ताल के चलते कई इलाकों में स्थानीय मेडिकल स्टोर बंद रहने से लोगों को दवाएं खरीदने में परेशानी हो सकती है। हालांकि अस्पतालों और सरकारी दवा केंद्रों के खुले रहने से जरूरी सेवाएं जारी रहने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि डिजिटल हेल्थ सेक्टर और पारंपरिक दवा कारोबार के बीच बढ़ते विवाद को देखते हुए सरकार आने वाले समय में ई-फार्मेसी के लिए नया नियामक ढांचा तैयार कर सकती है।
